बथुआ नदी के किनारे बनी मकान से नदी में जाता कचरा
रुद्रपुर। जिले के रुद्रपुर में बथुआ नदी का अस्तित्व लगातार मिट रहा है। नदी के उद्गम स्थल को बंद कर दिए जाने और तटवर्ती क्षेत्र में अंधाधुंध कॉलोनियां बसने से प्राकृतिक जलप्रवाह बाधित हो रहा है।
ग्लेशियर लेक फटने से नेपाल में आई हालिया तबाही और वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा से सबक न लेना भविष्य में जोखिम भरा साबित हो सकता है। पटवानिया गांव के निवासी पर्यावरण विद् एचएन सिंह ने इसे गंभीर पर्यावरणीय संकट बताते हुए नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई है। बथुआ नदी का प्राकृतिक संबंध गोर्रा नदी से रहा है। गोर्रा नदी से निकलकर पुनः गोर्रा नदी में मिलने वाली इस नदी के उद्गम स्थल को जंगल भुसवल के पास 90 के दशक मे बंद कर दिया गया।
करीब 100 किलोमीटर की यात्रा के बाद बथुआ मदनपुर के पास गोर्रा नदी में मिलती है। प्राकृतिक जलस्रोत बंद होने के बाद अब यह नदी कई हिस्सों में बरसाती नाले का रूप ले चुकी है। नदी में साफ पानी की जगह शहर का कचरा और सीवरेज का पानी बहने से जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।