कोरोना के खौफ से दब जाएगी शहनाई की धुन
गर्मी के सीजन की शादियां टाल रहे वर-वधु पक्ष
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह की तैयारी भी ठंडी
देवरिया। भले ही पीएम ने लॉकडाउन की घोषणा 14 अप्रैल तक की हो, लेकिन कोरोना वायरस के खौफ को देखते हुए तमाम वर-वधु पक्ष ने आगामी दो महीनों में होने वाले विवाह के कार्यक्रम टाल दिए हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से हर साल कराए जा रहे मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की तैयारी भी ठंडी पड़ गई है।
शासन से विभाग को अब तक कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। हां इतना जरूर कहा जा रहा है कि इस सत्र में सामूहिक विवाह के लाभार्थियों से आवेदन ऑफलाइन के जगह ऑनलाइन प्राप्त किए जाएंगे। नए सत्र में कितने जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य है, शासन से कितना बजट मिलेगा, अभी इसकी जानकारी विभाग को नहीं भेजी गई है। समूचा सरकारी तंत्र कोरोना महामारी से निपटने में लगा है। 15 अप्रैल के बाद विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो रहे हैं। तमाम लोगों ने अप्रैल, मई, जून व जुलाई में शादी की तारीख तय रखी है। शहर में विवाह भवन तो गांवों में लोगों ने टेंट, लाइट, हलुवाई, मिठाई, वेटर, वाहन, बैंडबाजा, आर्केस्ट्रा आदि की बुकिंग छह माह पहले ही कर ली। अब कोरोना का संकट गहराने और लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद लोगों को आयोजन फीका पड़ने का खतरा सताने लगा है। गर्मी के सीजन में प्रस्तावित शादियां नवंबर, दिसंबर व जनवरी के लिए टाली जा रही हैं। समाज कल्याण अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत होने वाली शादियों के लिए शासन स्तर से अभी कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। लॉकडाउन होने से सामूहिक विवाह आयोजन की प्रक्रिया प्रभावित है।
शादियां टलने से बढ़ेगी बेरोजगारी
अप्रैल से जुलाई के बीच होने वाली शादियां टलने से वेटर, हलुआई, फूल कारोबारी, फ्रूट स्टाल, चाट स्टाल आदि लगाने वाले तमाम लोगों की बेरोजगारी बढ़ जाएगी। वहीं ये शादियां नवंबर, दिसंबर, जनवरी में आयोजित होने से महंगाई डेढ़ गुना बढ़ने के आसार हैं।