तरकुलवा। पशु तस्करी के लिए गाजीपुर, आजमगढ़ जिले मुफीद हैं। यही कारण है कि पशु तस्कर इन जनपदों में अपना नेटवर्क ज्यादा फैलाए हुए हैं। काफी सस्ते दाम पर पशु मिल जाते हैं, जिन्हें तस्कर काफी महंगे दाम पर बिहार के रास्ते झारखंड और पश्चिम बंगाल ले जाकर बेचते हैं।
पशु तस्कर देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज आदि जिलों के ग्रामीण इलाकों से सस्ते दर पर पशुओं को इकट्ठा करने के बाद उनकी खेप को पिकअप और ट्रकों के द्वारा गाजीपुर और आजमगढ़ में तय स्थानों पर पहुंचाते हैं।
यहां से आजमगढ़-दुल्हपुर के रास्ते बिरनो, जंगीपुर, रजागंज पुलिस चौकी होते हुए जमानिया कोतवाली के रास्ते गहमर थाने से होकर बिहार चले जाते हैं। यह रास्ता थोड़ा घुमावदार जरुर है, लेकिन पूरी तरह रात में सुरक्षित रहता है।
जबकि दूसरा रास्ता दुल्हपुर से नोनहरा थाने से होते हुए मुहम्मदाबाद कोतवाली के बालापुर पुलिस चौकी से होकर बलिया के नरही थाने के भरौली तिराहे से बिहार (बक्सर) को निकलता है। बताते हैं कि ग्रामीण प्रति मवेशी 200 से 500 रुपये लेकर तस्कर तक पहुंचा देते हैं।
वे पशुओं को घेरकर किसी सूनसान जगह पर इकट्ठा करते हैं और पशु तस्करों को बुलाकर 5000 रुपये में एक ट्रक और 3000 रुपये में एक पिकअप पशु लोड कराते हैं। बाद में4 एक ट्रक पशुओं की कीमत लगभग एक लाख और एक पिकअप पशुओं की कीमत पचास हजार रुपए हो जाती है, जो ड्राइवर पशुओं की खेप को पहुंचाता है, उसे एक रात का 7-8 हजार रुपये मिलते हैं।