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Deoria News: 12 सालों से सरयू के कहर का दर्द झेल रहे कुरह परसियां के लोग, सुविधाओं से वंचित है शहीद का परिवार

Wed, 18 Feb 2026 12:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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बरहज के देवरिया-बेलडॉड़ मार्ग ​स्थित खाली टोला में कुरह परसियां के विस्थापित और शहीद पंडित विश्
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बरहज। सरयू नदी के कटान से 2014 में शहीद विश्वनाथ मिश्र का गांव कुरह परसियां का वजूद समाप्त हो चुका है। गांव के विस्थापित लोग करीब 12 सालों से इसका दर्द झेल रहे हैं। देवरिया-बेलडाड़ मार्ग स्थित खाली टोला में रह रहे शहीद विश्वनाथ मिश्र का परिवार और कुछ विस्थापित परिवार आज भी प्रशासन से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हैं। जिसका उनको मलाल है।
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रामजानकी मार्ग से दक्षिण कपरवार संगम तट से करीब 350 मीटर पूरब बसा कुरह परसियां गांव में 400 से 500 घरों में सभी जाति-वर्ग के लोग निवास करते थे। इसी गांव में शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र का परिवार भी रहता था। कैप्टन मूर की गोली से शहीद हुए पंडित विश्वनाथ मिश्र की शहादत और देश की आजादी में योगदान को लेकर लोग फूले नहीं समाते हैं। 14 अगस्त 1942 को कैप्टन मूर की गोली लगने के बाद भी पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल ने बरहज के मुख्य चौक पर तिरंगा फहराकर क्षेत्र को आजाद घोषित कर दिया था, लेकिन प्राकृतिक कहर ने उनके परिजनों के अलावा गांव के सभी लोगों का सब कुछ छीन लिया। 2007 से 2014 तक हुए नदी के कटान के कारण गांव भौगोलिक नक्शे से गायब हो गया। शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र के भतीजे श्याम बिहारी मिश्र, सलाबी यादव, सत्यप्रकाश आदि का कहना है कि जहां एक ओर सरयू के कहर का दर्द सालता है, वहीं प्रशासन की ओर से आज तक कोई मदद नहीं मुहैया कराई गई। जो नेता और अधिकारी हाल पूछने आए, वह दोबारा वापस नहीं लौटे।

शहीद के परिवार और गांव से आए कुछ विस्थापितों को नहीं मिली है कोई सुविधा
पूर्व में सरयू के मुहाने पर बसे कुरह परसियां का अस्तित्व नदी में हुई कटान के कारण भौगोलिक नक्शे से गायब हो गया। गांव के लोग इधर-उधर शरण लेकर जीवनयापन करने पर मजबूर हैं। वहीं प्रशासन की ओर से कुछ जगहों पर लोगों को दो-दो डिस्मिल जमीन मुहैया कराई गई है। बेलडाड़-देवरिया मार्ग स्थित खाली टोला में रह रहे शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र के भतीजे श्याम बिहारी मिश्र का कहना है कि मोहल्ले में विस्थापितों के छह से सात परिवार रहते हैं। यहां सड़क तो है, लेकिन जल जीवन मिशन के तहत प्याऊ के अलावा अन्य सुविधाएं नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से शुरू में नदी में कटे घरों के स्वामियों को दो-दो डिस्मिल जमीन दी गई, लेकिन बाद में हुए कटान से प्रभावित अधिकांश लोग आज तक इन सुविधाओं से वंचित हैं। खाली टोला में निवास कर रहे शहीद के परिवार और गांव से आए लोगों की कोई मदद नहीं की गई। ये लोग किसी तरह अपना गुजर-बसर कर रहे हैं।
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रेत और पानी में है जमीन, नदी पार बचे खेतों को जोत रहे दबंग
सरयू के कहर से कुरह परसियां गांव और खेतों का अस्तित्व समाप्त हो गया। आज भी जमीन, रेत और पानी के नीचे दबी हुई है। कुरह परसियां के विस्थापित श्याम बिहारी मिश्र, सतीश आदि का कहना है कि प्रत्येक के पास करीब चार से पांच बीघा जमीन थी। इसमें कुछ जमीन रेत और पानी के नीचे दबी है, जबकि कुछ जमीन सरयू पार है। जिस पर कुछ दबंगों ने कब्जा कर लिया है। कई बार संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हमें न तो सहयोग मिला और न ही हमारी जमीन से कब्जा हटवाया गया।
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