देवरिया। शहर के विकास का जिम्मा संभालने वाली नगर पालिका का खजाना खाली है। सात माह से नगर पालिका को कोई बजट नहीं मिला है। स्थानीय स्रोत से होने वाली आय भी करदाताओं की उपेक्षा के चलते अटकी है। गृहकर-जलकर के रूप में लाखों की धनराशि बकाएदार जमा ही नहीं कर रहे। 50 लाख से अधिक का बकाया तो सिर्फ सरकारी विभागों पर ही है। पालिका प्रशासन का आलम ये है कि रकम न होने के बाद भी बकाया टैक्स वसूली की जहमत उठाने वाला कोई नहीं। बजट के अभाव में जरूरी खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। न तो विकास की योजनाएं परवान चढ़ पा रही हैं और न ही अधूरे कार्यों को रफ्तार मिल रही है।
करीब डेढ़ लाख की आबादी को पेयजल, साफ-सफाई, सड़क आदि की सुविधा उपलब्ध कराने का जिम्मा नगर पालिका का है। यह कार्य पालिका शासन से मिलने वाले बजट व जलकर-गृहकर, टैक्सी स्टैंड सहित अन्य स्रोतों से होने वाली आय से पूरा करती है। खजाना खाली होने से यह कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शहर में 50 फीसदी से अधिक छोटी नालियां टूटी पड़ी हैं। सड़कें खस्ताहाल हैं। वार्डों की पुरानी सड़कें टूट चुकी हैं। नई सड़कों के लिए वार्ड सदस्य प्रस्ताव दे रहे हैं पर काम नहीं हो रहा। सफाई अनुभाग में उपकरणों की कमी है। पुरानी हो चुकी जेसीबी काम लगने पर धोखा दे जाती है। हाथ ठेला नहीं होने से कूड़ा उठाने में सफाईकर्मियों को दिक्कत होती है। गलियों से कूड़ा ढोने के लिए वाहनों की कमी है। जहां-तहां नालियां टूटी पड़ीं हैं। नगर पालिका नालियों फिर से निर्माण कराना तो दूर उनकी मरम्मत कराने की स्थिति में ही नहीं है। बजट के अभाव में सभी कार्य ठप पड़े हैं। निर्माण खंड काफी दिनों से बजट के लिए टकटकी लगाए बैठा है।