संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया/लार। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं-पुरुषों को आसान किस्तों का झांसा देकर समूह लोन के जाल में उलझाते हैं।
सिर्फ सप्ताहवार यह फिर माहवार किस्त जमा करने की बात बताते हैं। यह महिलाओं को आसान लगता है और झांसे में आकर लोन ले लेती हैं।
इसके बाद शुरू हो जाता मनमाने तरीके से किस्त वसूली सिलसिला। यही वजह है कि मोटी किस्त और एजेंटों की प्रताड़रा से तंग आकर महिलाएं घर-बार छोड़कर दूसरे शहर में रह रही हैं।
लार नगर के मठ वार्ड निवासी शुद्धि देवी ने बताया कि चार साल पहले एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से लोन लेने की इच्छा जाहिर की। दूसरे दिन घर पहुंचे एजेंट ने आधार कार्ड लेने के बाद फाइल पर अंगूठा लगवा लिया। ब्याज दर बताने की जगह साप्ताहिक और माहवार किस्त बताया।
इसके बाद 50 हजार रुपये लोन के रूप में दे दिए। चार हजार रुपये बीमा के नाम पर जमा करा लिया। प्रत्येक माह 15 सौ रुपये किस्त जमा की। बावजूद एजेंट ने 12 हजार रुपये अधिक जमा करा लिए।
सुनैना के मुताबिक जरूरत पड़ने पर 50 हजार रुपये का माइक्रो फाइनेंस कंपनी से समूह लोन लिया था। निर्धारित तिथि पर किस्त जमा करती रही।
फिर भी एजेंट ने झांसे में डाल 12 हजार से अधिक रुपये वसूल लिए। इसकी जानकारी तब हुई जब पति ने हिसाब किया। एजेंट को फोन कर बुलाया गया तो जल्द आने की बात कह फोन रख दिया। कुछ दिनों बाद इलाका छोड़ फरार हो गया।
ठाकुर गौरी गांव के रुदल ने कहा कि एजेंट कम पढ़ी-लिखी महिलाओं का खूब फायदा उठाते हैं। उन्हें झांसे में लेकर कम किस्त पर लोन देने का प्रलोभन देते हैं। बाद में मनमाने तरीके से किस्त की वसूली करते हैं।
महिलाओं को कुछ भी पता नहीं रहता है कि ब्याज दर कितनी है। एक दिन भी किस्त जमा करने में विलंब होने पर एजेंट किस्त के साथ ब्याज जोड़ देते हैं।