मईल। किसी का बुरा मत सोचो, किसी का बुरा मत करो, किसी का बुरा मत होने दो। अगर आप ऐसा करते हैं तो किसी की ताकत नहीं जो तुम्हारा बुरा कर दे। गुरु का स्थान शास्त्रों में सर्वोच्च होता है। गुरु उसे कहते हैं, जो शिष्य के हृदय के अंधकार को नष्ट कर उसमें सुंदर ज्ञान का प्रकाश भर दे। इसलिए जीवन में गुरु बनाना परम आवश्यक है। बिना गुरु के प्राणी का कल्याण संभव नहीं होता।
ये बातें चंद्रेश्वर महादेव धाम देवढ़ी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए कथा व्यास श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर जी महाराज ने तीसरे दिन की कथा सुनाते हुए कहीं। इससे पहले मुख्य यजमान अक्षयवर मिश्र व सूर्य नारायण मिश्र जी ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस दौरान प्रमोद मिश्र, विवेकानंद मिश्र, रविंद्र सिंह, उग्रसेन सिंह, देवेंद्र मिश्रा, भूपेन्द्र सिंह, तारापति सिंह, उदय प्रताप सिंह, सूर्य प्रताप सिंह, श्रीनारायण मिश्रा, आजाद सिंह,रामईश्वर सिंह, अशोक सिंह आदि उपस्थित रहे।