दो वर्ष पूर्व आईआईटी रुड़की की टीम ने किया था मॉडल स्टडी, आड़े आ रही जांच
बरहज। सरयू नदी की धारा में परिवर्तन के कारण निर्माणाधीन मोहन सेतु परियोजना अधर में है। पाट चौड़ा हो जाने के कारण दो वर्ष पूर्व रूड़की की टीम ने मॉडल स्टडी किया था। हालांकि जांच पूर्ण न होने और धन अभाव के कारण इस बार भी मोहन सेतु निर्माण कार्य ठप है। जिसके शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं है। जिसको लेकर लोगों में नाराजगी है।
पूर्व राज्यसभा सांसद कनकलता सिंह की पहल पर 2013 में उनके पिता, सपा सचेतक और पूर्व सांसद स्व.मोहन सिंह के स्मृति में सेतु का शिलान्यास किया गया था। करीब 95 करोड़ की लागत से 39 पाये पर 12.011 मीटर लंबा, 7.5 मीटर चौड़ा पुल निर्माण कार्य कराया जाना था। लेकिन 2017 में धन के अभाव में निर्माण कार्य ठप हो गया। दोबारा रिवाइज स्टीमेट जारी होने पर 157 करोड़ छह लाख 14 हजार रुपये के बजट से कार्य शुरू कराया गया। लेकिन दक्षिणी छोर पर हो रहे बेतहाशा कटान से नदी पुल के आखिरी पाये से काफी दूर चली गई है।
आईआईटी रुड़की के प्रो. जुल्फिकार की टीम ने मॉडल स्टडी करते हुए रिपोर्ट तैयार किया गया। जिसमें पुल को 10 मीटर और चाड़ा बनाये जाने की योजना है। इस बार भी बारिश से पूर्व पुल निर्माण कार्य शुरू होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। लोगों के अनुसार पुल के बनने से नदी पार के परसियां-विशुनपुर देवार के गांवों के अलावा आजमगढ़, मऊ, वाराणसी आदि जनपदों के लिए लोगों की राह आसान हो जाएगी।
कोट-
पुल निर्माण को लेकर जांच की जा रही है। रिपोर्ट आते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
क्षितिज जायसवाल सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी देवरिया
0 पुल न होने के कारण परसियां-विशुनपुर देवार के लिए रास्ता दुर्गम है। जहां पुलिसिया आवाजाही कम होने के कारण आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए महफूज शरणस्थली बना हुआ है। पुल बन जाने से आपराधिक गतिविधियों में कमी आएगी। जबकि बारिश के दिनों में भी आवागमन सुलभ होगा।
अंबिकेश सिंह
0 दियारा का रास्ता दुर्गम होने के कारण स्कूली छात्र, नौकरीपेशा, छोटे-बड़े व्यवसाई सहित अन्य लोगों को आवाजाही में दिक्कतें आती हैं। पुल बन जाने से लोगों को जान जोखिम में डालकर नाव से सफर नहीं करना पड़ेगा।
चंद्रगुप्त यादव