गौरी बाजार लेबर अड्डे पर काम की तलाश में खड़े मजदूर।
बखरा (देवरिया)। सर्द हवाओं, शीतलहर तथा घने कोहरे के बीच पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में जारी हाड़कंपा देने वाली कड़ाके की ठंड से आमजन जीवन बेहाल है। विशेष कर यह जानलेवा ठंड बच्चों, बुजुर्गों, बेजुबानों, गरीब बेसहारा निर्बल वर्ग के लोगों, किसानों तथा दिहाड़ी मजदूरों पर कहर बनकर टूट रहा है।
सूर्य के दर्शन दुर्लभ होने के कारण लगातार तापमान कम रह रहा है। बीते एक सप्ताह से न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेंटीग्रेड और अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास रह रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान एक डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। यह 10 डिग्री सेंटीग्रेड रहा। वहीं अधिकतम तापमान भी एक डिग्री बढ़कर 19 डिग्री सेंटीग्रेड हो गया। इसके बावजूद ठंड कम नहीं हुई। गलन बरकरार रहा।
इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। नतीजा यह है कि भवन निर्माण से लेकर कृषि कार्यों पर इसका सीधा अवसर पड रहा है। दिन छोटा होने से अधिकांश निर्माण कार्य ठप पड़ गए हैं, जिससे दिहाड़ी मजदूर को काम मिलना मुश्किल हो गया है। रोजी-रोटी के अभाव में उनकी दैनिक दिनचर्या काफी हद तक प्रभावित है। घर के खर्चे जुटाने में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। काम की तलाश में लेबर अड्डों पर सुबह से शाम तक खड़े रहने के बावजूद मजदूरों को काम के अभाव में वापस घर लौटना पड़ रहा है।
ईंट-भट्टों पर कच्चे ईंटों की पथाई कार्य में लगे मजदूरों को ईंट न सूखने के कारण उनका कार्य ठप पड़ता जा रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई है। रोजी-रोटी के अभाव में वह काफी परेशान हैं।
इधर, ग्रामीण अंचलों में रवि फसलों की बुआई के बाद सिंचाई कार्य में लगे किसानों को कड़ाके कि इस ठंड में दिन रात की चिंता किये बगैर फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है। यह किसी मुसीबत से कम नहीं है। किसान अपने जान की परवाह न कर फसलों की सिंचाई कार्य में लगे हैं। हाड़ कंपा देने वाली इस ठंड ने उनके समक्ष एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है।