मईल। मुहर्रम पर शासन ने ताजिया की अधिकतम ऊंचाई 12 फुट निर्धारित किया था। इसके विरोध में मईल और बगही समेत पांच गांवों के ताजियादार अपनी ताजिया पारंपरिक मिलन स्थल मईल चौराहे पर लेकर नहीं आए। हालांकि, देर रात उन लोगों ने स्वेच्छा से कर्बला में ले जाकर दफन कर दिया।
जानकारी के अनुसार, हर वर्ष बगही, नरियावं, पिपरा बांध, पिपरा दवन और मईल समेत सात गांवों की ताजिया मईल चौराहे पर पहुंचती है, जहां ताजिया का मिलान होता है। इस दौरान ताजियादार पारंपरिक खेल और करतब का प्रदर्शन करते हैं। इस वर्ष प्रशासन ने 12 फुट तक की ताजिया निकालने की अनुमति दी थी, जबकि बगही गांव में करीब 22 फुट ऊंची ताजिया तैयार की गई थी। बगही के ताजियादार कदम रसूल ने बताया कि ताजिया का निर्माण दो माह से चल रहा था। हर वर्ष की तरह इस बार भी 22 से 23 फुट ऊंची ताजिया बनाई गई थी। 19 जून को मईल पुलिस ने नोटिस देकर 12 फुट से अधिक ऊंची ताजिया निकालने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी, इसीलिए बगही के ताजियादारों ने ताजिया को चौराहे तक नहीं ले जाने का निर्णय लिया। इसकी जानकारी मिलने पर नरियावं, पिपरा दवन, पिपरा बांध और मईल के ताजियादारों ने भी अपने ताजिया चौराहे पर लेकर नहीं पहुंचे।
देर शाम पांचों गांवों के ताजियादारों ने धार्मिक कार्यक्रम संपन्न करने के बाद स्वेच्छा सेे ताजिया को दफन कर दिया।