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Deoria News: नदी के रुख बदलने से छोटा पड़ गया पिड़रा घाट का पक्का पुल

Tue, 24 Feb 2026 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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रुद्रपुर। दो नदियों से घिरे द्वाबा क्षेत्र में 43 साल पहले जब गोर्रा नदी पर पक्का पुल बना तो लोगों की दुश्वारियों से भरी जिंदगी बदलनी शुरू हो गई, लेकिन इस पुल को गोर्रा नदी ने रास्ता बदलकर छोटा कर दिया है। नदी का रूख मुड़ने से पिछले पांच साल से एप्रोच मार्ग कट रहा है। सड़क हर साल बरसात में पानी बढ़ने के साथ ही बंद कर दी जाती है। जिससे द्वाबा की दो लाख आबादी के अलावा आजमगढ़, मऊ, वाराणसी, जौनपुर और गाजीपुर को जोड़ने वाली इस सड़क पर बरसात के चार महीने आवाजाही ठप रहती है। पुल का मामला दोनों सदनों विधानसभा और विधानपरिषद में उठने के बाद पुल का तीन नया पिलर खड़ा करने का निर्णय लिया गया है। विशेषज्ञों की टीम के निरीक्षण के बाद सेतु निगम नए पिलर और एप्रोच बनाने में आने वाले खर्च का स्टीमेट तैयार कर रहा है।
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1983 में मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र ने किया था लोकार्पण
पिंडरा पुल का निर्माण कराने में कांग्रेस के विधायक भास्कर पांडेय का योगदान रहा। चारों ओर से नदियों से घिरे द्वाबा को वह पहला पक्का पुल भाष्कर पांडेय ने ही दिलाया था। पुल बनकर तैयार हो जाने पर वर्ष 1983 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्रा हेलीकॉप्टर से लोकार्पण करने आए थे। पिंडरा घाट निवासी जय सिंह बताते हैं कि पुल के नहीं होने से लोगों का जीवन बहुत दुष्कर था। रास्ता भी दुर्गम था। नदी पार करने के लिए नाव ही सहारा थी। जिला और तहसील मुख्यालय का रास्ता पहाड़ चढ़ने जैसे लगता था। पुल बनने के बाद क्षेत्र के विकास में बहुत तेजी आई। पचलड़ी के मुरारी गौड़ ने कहा कि पिंडरा पुल बन जाना तब लोगों को सपने जैसा लग रहा था। 1983 में पिंडरा पुल गोर्रा नदी पर बना तो जिले का रास्ता आसान हो गया और 2001 में राप्ती नदी पर करहकोल का पुल बन जाने से दोआबा क्षेत्र गोरखपुर, बनारस, मऊ आजमगढ़ आदि कई जिलों से जुड़ गया।
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