संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। यौन शोषण के आरोपी जिला पंचायत सदस्य के पति मनोज कन्नौजिया को पुलिस खोज नहीं पा रही है। जबकि सदर कोतवाली में दुष्कर्म और पॉस्को एक्ट का केस दर्ज हुए 10 दिन हो चुका है।
बुधवार को एसपी विक्रांत वीर ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। जबकि बृहस्पतिवार को कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है।
उधर, आरोपी के पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ने से पीड़ित परिवार पुलिस पर सवाल उठा रही है। साथ ही, जान को खतरा भी बताया है। चर्चा है कि आरोपी राहत के लिए हाईकोर्ट का चक्कर लगा रहा है।
सूत्रों की मानें तो घटना के बाद से आरोपी जिले के कुछ जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में रह रहा है। इसके चलते पुलिस आरोपी को उठाने से कतरा रही है। सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के रहने वाला और जिला पंचायत सदस्य का पति मनोज कन्नौजिया की गिरफ्तारी पुलिस के लिए सिर दर्द बरा है। एसपी विक्रांत वीर की गठित टीमें जिले के अलावा बिहार प्रांत में भी दबिश दे रही है, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आ रहा है। आरोप है कि बुधवार की रात पुलिस आरोपी के घर दबिश डालने गई थी, मगर दरवाजे से लौट आई।
बृहस्पतिवार को विवेचक सदर कोतवाल दिलीप सिंह ने विशेष न्यायाधीश पाॅस्को एक्ट प्रथम के समक्ष गैर जमानती वारंट के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। न्यायाधीश ने आरोपी जिला पंचायत सदस्य के पति के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। पीड़िता के पिता का आरोप है कि जिला पंचायत सदस्य का पति ने छह मार्च को रिश्ते की 17 वर्षीय बहन चार पहिया वाहन से देवरिया ले गया था। देवरिया के सोनूघाट चौराहे पर उसकी नीयत डोल गई और ट्राफी में नशीली दवा मिलाकर खिला दिया। जब वह बेहोश हो गई तो देवरिया रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में ले जाकर जबरन यौन शोषण किया था।