लार। बेसिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों का विरोध-प्रदर्शन तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। विकास खंड लार के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल एवं कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं 23 फरवरी से ही बांह में काली पट्टी बांधकर विद्यालयों में शिक्षण कार्य करते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं।
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले चल रहे आंदोलन के तीसरे दिन बुधवार को भी शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाया। इसके अलावा बीएलओ व एसआईआर के दायित्वों का निर्वहन करते समय भी काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध जता रहे हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. गोविंद मिश्रा ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता शिक्षकों के हित में नहीं है और इससे कार्यरत शिक्षकों का भविष्य असुरक्षित हो सकता है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों के हित में ठोस निर्णय लेने की मांग की। शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि मांगों को लेकर आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बीएसए कार्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन और घेराव की तैयारी की गई है।
वर्षों की सेवा के बाद फिर परीक्षा पर सवाल
शिक्षकों का कहना है कि यदि डॉक्टर, जज या पुलिस कर्मियों को भी वर्षों की सेवा के बाद अचानक फिर से उसी प्रकार की परीक्षा में बैठाया जाए तो क्या वे सहज रूप से उसे पास कर पाएंगे। समय के साथ अनुभव बढ़ता है, कार्यशैली बदलती है, लेकिन परीक्षा का प्रारूप अलग होता है। ऐसे में लंबे सेवाकाल के बाद पुनः परीक्षा की अनिवार्यता उन्हें मानसिक रूप से विचलित और असहज कर रही है।