सलेमपुर। जिले में क्षय रोग (टीबी) के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 542 गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में चिन्हित किया है। इन गांवों में विशेष स्वास्थ्य कैंप लगाकर संदिग्ध मरीजों की जांच की जाएगी और रोग की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू कराया जाएगा।
24 मार्च से अब तक जिले के करीब 40 गांवों में कैंप लगाकर जांच कराया गया है जिसमें सैकड़ों नए टीबी मरीज सामने आए हैं, जिनका इलाज जारी है। बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि जिले की कई ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद नियंत्रण के लिए अभियान तेज कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण इलाकों में पोर्टेबल मशीनों के जरिए जांच अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे लोग, जिन्हें एक सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी, बुखार या अन्य लक्षण हैं, उन्हें चिन्हित कर जांच की जा रही है। सलेमपुर ब्लॉक के रजवल, बरसात, चेरो, चकरा गोसाई, चांदपलिया, इटहुआ चंदौली, बंजरिया, मधवापुर, कस्बा सलेमपुर, औरंगाबाद, निजामाबाद, देवरिया उर्फ शामपुर, रामपुर बुजुर्ग, बैदौली, मंगराइची, धनपुरवा, परान छपरा, महदहा बाग और पकड़ी लाला सहित कई गांवों को इस अभियान में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च तक जिले में 1680 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि समय पर जांच और उपचार से इस बीमारी पर नियंत्रण संभव है।