संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मुहर्रम के 10वीं तारीख पर रविवार को जिले भर में ताजिया जुलूस निकाला गया। अखाड़ों के खिलाड़ियों ने हैरतंगेज करतब दिखाए। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे। शहर में या हुसैन और नारे तकबीर अल्लाह हो अकबर नारे गूंजते रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों के ताजियादार और अखाड़ा के खिलाड़ी अपने ताजिया के साथ निकले, जो विभिन्न मार्ग से होते हुए मालवीय रोड पर पहुंचे। इस दौरान अंजुमन इस्लामिया के सदर जलालुद्दीन खान ने ताजिएदारों और अखाड़ा के खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया ।
शहर में स्टार क्लब अब्बासिया अखाड़ा, चांद क्लब न्यू काॅलोनी, फाइब स्टार क्लब बांस देवरिया, इस्लामिया क्लब देवरही टोला, इलाही क्लब इलाही टोला, ताज क्लब देवरिया खास, थ्री स्टार क्लब अली नगर, इस्लामिया अखाड़ा रामनाथ देवरिया, नाईन स्टार क्लब रामगुलाम टोला, एकता क्लब पिपरपाती, न्यू ताज क्लब रघवापुर, लठिया सलार अबूबकर नगर सहित सभी अखाड़ों के ताजिएदारों ने एक से बढ़कर एक ताजिया लेकर मालवीय रोड पर पहुंचे।
जुलूस के दौरान खिलाड़ियों ने हैरतंगेज करतब दिखाए। अली नगर निवासी शहजाद कुरैसी की राजमा की ताजिया प्रथम, बतासा गली निवासी प्रमोद द्वारा मूंज व रस्सी से तैयार की गई ताजिया द्वितीय व जलकर रोड के मरहूम रमजान के बेटों द्वारा तैयार की गई ताजिया तृतीय स्थान पर रही। तजिएदारों को अंजुमन इस्लामिया के सदर जलालुद्दीन खान, गुरुद्वारा के ग्रंथी दामोदर सिंह, सपा नेता हृदय नारायण जायसवाल, भाजपा की बेबी खातून ने ताजिएदारों को सांत्वना पुरस्कार सहित अन्य सामान देकर पुरस्कृत किया। देसही देवरिया संवाद के अनुसार, क्षेत्र में रविवार को मुहर्रम का त्योहार लोगों ने कर्बलों में ताजिया दफन कर मनाया।
ताजियों के साथ झंडी लेकर चल रहे बच्चों के मुंह से निकल रहे नारे तकबीर के नारे मन को मोह ले रहे थे। सुरक्षा के इंतजाम में लगी पुलिस भी मुस्तैद रही।
क्षेत्र में रविवार को लोगों ने शहादत के प्रतीक मुहर्रम त्योहार को शांतिपूर्वक मनाकर शांति और सौहार्द पेश किया। तरह - तरह की बनाई गई ताजिया लोगों को अपने तरफ आकर्षित कर रही थी। ताजिएदार आपस में मिलन कर ताजिए को कर्बला में ले जाकर दफ्न कर हुसैन की शहादत को याद किया।
पिपरा मदन गोपाल और रामपुर हिरामन गांव के बीच स्थित कर्बला सबसे बड़ा कर्बला है। इमामबाड़ा गांव के काजी की ताजिया, देवरिया बुद्धू खां, पिपरा मदन गोपाल, भरथापट्टी आदि गांवों की ताजिया आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा महुआडीह के बेलवा माफी, लक्ष्मीपुर, महवा आदि कर्बलों में भी मेला में भीड़ रही। ताजिया दफन की गई।