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पहले रुपये का हिसाब कराया फिर चिता को आग लगाया

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पहले रकम का हिसाब हुआ, फिर पिता को दी मुखाग्नि
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तरकुलवा के बरठही गांव का मामला, बहनोई ने निकाल लिए थे पिता के रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
तरकुलवा (देवरिया)। बरठही गांव में बेटे ने रकम के हिसाब को लेकर पिता का दाह-संस्कार करने से रोक दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब समझौता कराया तब जाकर उसने पिता को मुखाग्नि दी।
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तरकुलवा के बरठही गांव निवासी रामजस यादव के दो बेटे रमेश, राजू और दो बेटियां चानमती और रंजू हैं। एक बेटी के पिता और बड़े बेटे रमेश की कुछ दिन पहले मौत हो गई। उनकी मौत के बाद बेटी रंजना को ससुराल में छोड़ पत्नी कहीं चली गई। छोटा बेटा राजू ट्रक चलाकर परिवार की जीविका चलाता है। वह अधिकांश समय बाहर ही रहता है। इधर, रामजस ने कुछ माह पहले अपनी जमीन साढ़े सात लाख रुपये में बेच दी थी। उन्होंने पांच लाख रुपये बैंक में जमा कर दिए। बाकी रकम बड़े दामाद लालजी को दवा और खर्च चलाने के लिए दे दिए। इधर, दो जनवरी को दामाद लालजी ने रामजस को बैंक ले जाकर ढाई लाख रुपये निकाल लिए। इस बीच शुक्रवार को रामजस का निधन हो गया। यह खबर जब बेटे राजू को मिली तो वह घर पहुंचा। दाह संस्कार की तैयारी होने के बाद भी उसने दरवाजे पर शव रोक दिया और पिता के रुपये का हिसाब मांगने लगा। इस बात पर बहनों से उसकी कहासुनी होने लगी। बड़ी बहन ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने गांववालों की मदद से लालजी से पूरी रकम वापस कराई। इसके बाद राजू ने पिता का दाह-संस्कार किया। इस बाबत एसओ नरेंद्र प्रताप राय ने बताया कि पुलिस ने मौके पर जाकर मामला सुलझा दिया है।
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