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आईएएस दिव्या मित्तल से जुड़ी कुछ चर्चित घटनाएं: बरहज के विधायक से टकराव से लेकर फतेहपुर कांड तक, जानें सब कुछ

Sun, 30 Aug 2026 01:38 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया

सार

पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। जनप्रतिनिधियों से टकराव, प्रशासनिक निर्णयों में देरी और मंदिरों में नृत्य उनके कार्यकाल की मुख्य बातें थीं।
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दिव्या मित्तल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल अपने कार्यकाल के दौरान लगातार सुर्खियों में बनी रहीं। प्रशासनिक कार्यशैली से लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ टकराव और विवादित फैसलों को लेकर उनका देवरिया में डीएम का कार्यकाल चर्चा के केंद्र में रहा।  

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जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान विकास भवन के गांधी सभागार में तीन जुलाई 2025 को बरहज विधानसभा क्षेत्र से विधायक दीपक मिश्र और डीएम दिव्या मित्तल के बीच तीखा टकराव सामने आया था। देवरिया करुअना मार्ग के निर्माण में देरी और सेवानिवृत्ति के बाद भी एक शिक्षिका के वेतन भुगतान के मुद्दे पर बहस के बाद बरहज विधायक बैठक छोड़कर चले गए, तब डीएम दिव्या मित्तल ने जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक नियमों और जीओ का हवाला देते हुए तल्ख नसीहत दी थी। 

इसके बाद एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने डीएम से मामला सुलझाने को कहा था। वहीं देवरिया के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी और कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने भी बाद में इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। इस घटना ने लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर सवाल खड़े किए थे और यह मामला प्रदेश स्तर तक चर्चा में रहा। इस मामले में दिव्या मित्तल पर तत्कालीन बीएसए का बचाव करने का भी आरोप लगा।

नतीजा तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी निरंकुश होती गईं और शिक्षक कृष्णमोहन सिंह ने अपना प्रकरण निस्तारित न करने और रुपया मांगने का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर लिया। इस प्रकरण से भी डीएम की कार्यशैली पर सवाल उठे थे। हालांकि उनका इस प्रकरण से कोई लेना देना नहीं था।

इसके अलावा दो अक्तूबर 2023 को हुए फतेहपुर कांड में सात लोगों की हत्या के बाद मृतक प्रेमचंद यादव के घर की जमीन सरकारी होने के बावजूद इस पर कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में मृतक के परिजन हाईकोर्ट चले गए थे। उनका मामला हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इस बीच दिव्या मित्तल देवरिया की डीएम बनकर जिले में आ गईं। लेकिन मामला प्रशासनिक स्तर पर लंबित रहने के बावजूद दो साल में दिव्या मित्तल ने कोई निर्णय नहीं लिया।

धार्मिक आयोजनों और मंदिरों में अधिक ध्यान देने का आरोप
प्रशासनिक गलियारों और आम जनता के बीच यह चर्चा भी जोरों पर रही कि डीएम दिव्या मित्तल का ध्यान जिले की मुख्य प्रशासनिक और विकास योजनाओं से अधिक धार्मिक गतिविधियों और मंदिरों के आयोजनों पर केंद्रित रहा। विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी अति-सक्रियता को लेकर विरोधियों और आलोचकों ने सवाल उठाए कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं को दरकिनार कर धार्मिक गतिविधियों को तरजीह दी गई।
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मर्यादा को ताक पर रखकर मंदिरों में नृत्य को लेकर विवाद
आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का मंदिरों के धार्मिक आयोजनों में उनका नृत्य करना पर भी चर्चा में रहा। प्रशासनिक मर्यादा और एक जिले के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी के आचरण को लेकर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई वर्गों ने इसे प्रशासनिक पद की गरिमा के प्रतिकूल माना। दिव्या मित्तल जुलाई 2024 से पांच मई 2026 तक जिले में डीएम के रूप में तैनात रहीं।
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