देवरिया। बड़े पहिया और तेज रफ्तार के चलते ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर लक्जरी वाहन के तौर पर सबसे सफल गाड़ी बोलेरो का तस्करों ने दुरुपयोग शुरू कर दिया है। तस्करों ने इस गाड़ी में बीच व पिछली वाली सीटों को निकालकर उस खाली जगह में बछड़े लोडकर बाॅर्डर पार कराने लगे। मझौलीराज पुलिस चौकी के पास हुए हादसे ने तस्करों के इस नए खेल का खुलासा किया।
पशु तस्करी के लिए आमतौर पर ट्रक और पिकअप का इस्तेमाल होता रहा है। पिकअप का इस्तेमाल तस्कर इसलिए करते हैं कि इस गाड़ी का चेसिस बड़ा मजबूत होता है। कंपनी की तरफ से इस पर दो टन तक का माल लोड करने का निर्देश होता है, लेकिन पांच टन तक माल ढुलाई हो जाती है। बड़े पहियों और तेज रफ्तार की वजह से ग्रामीण सड़कों पर इस वाहन से तस्कर आराम से पशुओं को लेकर चले जाते हैं। पीछा करके इस गाड़ी को रोकने में दिक्कत आती है। गाड़ी के आगे लगे लोहे के हुड से तस्कर पीछा करने वाली पुलिस की गाड़ी में टक्कर मारते रहे हैं। पिछले साल पुलिस को पिकअप गाड़ियों की निगरानी से लेकर उन गाड़ियों पर लगे लोहे के एंगल तक को कटवाना पड़ा था। हालांकि, अब पिकअप को देखते ही लोगों को इस गाड़ी पर संदेह होने लगता है। इसीलिए अब पशु तस्करों ने इसके अलावा छोटी लोडर गाड़ी मैजिक के अलावा बोलेरो का भी इस्तेमाल शुरू कर दिया है। बोलेरो में पशुओं को लोड करने के लिए उसमें पीछे व बीच में लगे सीट को हटवा दिया है।