देवरिया। जिले में इस साल मच्छर जनित बीमारियों से पीड़ित 1400 से अधिक रोगी मिल चुके हैं। एईएस से एक मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार जाग नहीं रहे हैं। नगर पालिका एंटीलार्वा का छिड़काव और फाॅगिंग कागजों में करा रही है तो मलेरिया विभाग के संसाधन बीमार पड़े हैं। डेंगू मच्छर के लार्वा की पहचान और लोगों को जागरूक करने के लिए अभी तक टीम गठित नहीं हो पाई है। जलभराव वाली जगहों पर खूब मच्छर पनप रहे हैं। ऐसे में आपको खुद जागना होगा। आसपास सफाई रखनी होगी और मच्छरों से बचाव के उपाय करने होंगे।
बरसात के मौसम में गंदगी और नालियों के जाम होने की वजह से शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। नगर पालिका के अफसर हर रोज फॉगिंग का दावा कर रहे हैं। जबकि मोहल्लेवासी कभी-कभार फागिंग होने की बात कह रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी शहर के नए वार्ड के लोगों को हो रही है। यहां जलभराव वाली जगहों पर न एंटीलार्वा डाले जा रहे न ही फाॅगिंग कराई जा रही है। दानोपुर मोहल्ले के राधेश्याम यादव, पियूष, गिरीश सिंह आदि का कहना है कि गांव को नगर में शामिल हुए एक साल हो गए अभी तक यहां नगर पालिका के कर्मचारी फाॅगिंग के लिए नहीं आए हैं। इसी तरह की परेशानी पिपरपाती, बड़हरा, चिंतामनचक, रजला आदि नए वार्डों के लोगों ने बयां की।
मच्छर के डंक से बचने के लिए लोग क्वायल, बिजली से चलने वाले उपकरण का उपयोग कर रहे हैं। इसमें प्रतिदिन उन्हें रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, नगर पालिका की ओर से हर रोज करीब दस हजार रुपये का डीजल, पेट्रोल और एक लीटर मैलाथियान टेक्निकल फॉगिंग मशीन में उपयोग का दावा किया जा रहा है। दावे का असर अफसर कालोनियों को छोड़ आम कालोनियों में नहीं दिखाई पड़ रहा। अधिकारी रात में चैन की नींद सोते हैं और आम जनता रतजगा कर मच्छर भगा रही है।
19 मशीनों में 12 खराब फिर भी दावा हर रोज फॉगिंग का
नगर पालिका के पास तीन फागिंग मशीनें हैं। इनमें से एक खराब है। पूरे शहर में फाॅगिंग के लिए हर महीने 50 लीटर मैलाथियान टेक्निकल की आवश्यकता है। 25 लीटर से काम चल रहा है। वहीं मलेरिया विभाग में 19 फॉगिंग मशीनें हैं। इसमें 12 खराब हैं। फागिंग की दवा मैलाथियान टेक्निकल की हर माह एक हजार लीटर की आवश्यकता होती है। पिछले महीने 50 लीटर शासन से मिला था, जो खतम हो गया है। वहीं, एंटीलार्वा ढाई सौ लीटर की जरूरत पड़ती है इसमें 145 लीटर उपलब्ध हो पाया है। ऐसे में एंटीलार्वा छिड़काव और फॉगिंग के विभाग के दावे स्वयं खोखले साबित हो रहे हैं।
खाली प्लॉट मतलब मच्छरों का बसेरा
शहर के विभिन्न मोहल्लों में जाम नालियों के साथ सबसे बड़ी समस्या खाली प्लॉट भी हैं। एक तो वहां पानी जमा होता है, दूसरे लोग कूड़ा भी फेंकते हैं। इस कारण ये स्थान मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन रहे हैं। इसके आसपास मच्छरजनित रोग फैलने की आशंका रहती है। इस तरफ अफसरों का ध्यान नहीं है। शहर के करीब 10 से 15 वार्ड ऐसे हैं जहां नालियों का समुचित इंतजाम नहीं है। लोग घरों का पानी खाली प्लाॅटों में बहा रहे हैं।
पुराने वार्डों में अधिक है परेशानी
रामुगलाम टोला पूर्वी, रामनाथ देवरिया दक्षिणी, चटनी गड़ही मोहल्ला, मंगलमपूरम, दानोपुर, नाथ नगर, सोमनाथ नगर, अली नगर, शहीद नगर, शांति नगर, महुआबारी आदि मोहल्लों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से खाली प्लाॅटों में पूरे साल जलभराव रहता है। नगर पालिका नाला सफाई तो करा रही है, लेकिन नालियों में एंटीलार्वा आदि का छिड़काव नहीं करा रही।
मोहल्ले में मच्छरों की भरमार साल के 12 महीने रहती है। बार-बार अनुरोध के बाद नगर पालिका मोहल्ले में एंटीलार्वा का छिड़काव व फॉगिंग कभी-कभी ही कराती है। - विवेक मिश्रा, चटनी गड़ही मोहल्ला
जलभराव वाली जगह पर नगर पालिका एंटीलार्वा नहीं डलवा रही। घर के पास भारी तादात में मच्छर पनपते हैं। शाम होते ही घरों में घुस जाते हैं। इसके बाद पूरी रात मच्छर मारते बीतती है। - अभिषेक भारती, अंबेडकर नगर।
नगर में शामिल हुए एक साल हो गए। अभी तक नगर पालिका ने इधर फॉगिंग नहीं कराई है। जलभराव वाली जगहों पर मच्छर पनप रहे हैं। मच्छर जनित बीमारियों का खतरा सता रहा है। - सत्येंद्र सिंह, दानोपुर।
वार्ड में न कहीं साफ-सफाई हो रही है न ही एंटी लार्वा का छिड़काव और फाॅगिंग कराई जा रही है। इसके चलते दिन में भी मच्छर काट रहे हैं। रात की नींद खराब हो जा रही है। - आशीष पांडेय, निकट आईटीआई।
अफसरों की काॅलोनी में होती है नियमित फॉगिंग
नगर पालिका बाकी शहर में फॉगिंग कराए या नहीं अफसरों की काॅलोनी में नियमित फॉगिंग कराती है। स्टेडियम के पास, विकास भवन, नगर पालिका कार्यालय, कलक्ट्रेट आदि जगहों पर अक्सर रात में फॉगिंग की महक आती है।
मच्छर जनित बीमारियों के आए इतने केस
- 1332 रोगी फाइलेरिया के मिले हैं।
- 25 मरीज एईएस व जेई के मिले हैं।
- 04 मरीज कालाजार के मिले हैं।
- 03 मरीज मलेरिया के मिले हैं।
- 93 केस डेंगू के 2022 में सामने आए थे।
मच्छरों के काटने से मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफिलाइटिस आदि बीमारियां होती हैं। अगर लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेकर दवा का सेवन करना चाहिए। अपने मकान के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें और जलभराव न होने दें।
- डॉ. एचके मिश्र, मेडिकल कॉलेज
रोस्टर के हिसाब से एंटी लार्वा का छिड़काव व फॉगिंग कराई जा रही है। एंटी लार्वा और मैलाथियान टेक्निकल की खरीदारी के लिए टेंडर निकला है। जल्द ही उपलब्ध हो जाएगा। लोगों को मच्छर जनित रोगों को लेकर खुद भी जागरुकता बरतनी चाहिए।
- रोहित सिंह, ईओ