देवरिया। गोवर्धन पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद महाराज ने श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर हो रही राजनीति पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने राजनीतिक दलों को आगाह किया कि वह श्रीराम के नाम का बेजा इस्तेमाल बंद करें। श्रीराम आराध्य हैं, कोई शतरंज के मोहरे नहीं। अयोध्या को राजनीतिक अखाड़ा बनाकर करोड़ों लोगों की आस्था से खेला जा रहा है। श्रीराम के नाम पर हुकूमत बेइमानी कर रही है, मंदिर अब तक बन जाना चाहिए था। सरकार के पास अब भी विश्वास जताने का मौका है। शंकराचार्य रविवार को देवरिया के टाउनहाल में आयोजित विप्र समागम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने देश में फैली सामाजिक असमानता पर सरकारों पर निशाना साधा और वैदिक परंपरा के ह्रास पर चिंता जताई। शंकराचार्य ने कहा कि वर्णाश्रम व्यवस्था की पुष्टि के लिए ही शंकराचार्य का जन्म हुआ। तब जाति व्यवस्था नहीं थी। जाति व्यवस्था का निर्माण देश तोड़ने की साजिश है। हिंद के शासकों को चिंतन करने की जरूरत है। एक ईंट खिसकी तो इमारत गिर जाएगी। जातियों में बंटा वर्ण आज आरक्षण की समस्या से पीड़ित है। ब्राह्मणों, गो, संत का अपमान हो रहा है। ब्राह्मण का दिया ज्ञान राजा का मार्गदर्शन करता है। इतिहास गवाह है जिन राजाओं ने ब्राह्मण का अपमान किया उनका पतन हो गया। बेहद अफसोस की बात है कि समाज को एक सूत्र में पिरोने वाले ब्राह्मणों पर मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं। ब्राह्मणों की प्रयोगशाला गुरुकुल को देश से समाप्त कर दिया गया।
समारोह में मुख्य वक्ता रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक शरद चंद्र पांडेय ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के विप्र समाज के तेज, बुद्धिमता और कौशल से सिकंदर जैसे विदेशी आततायी भी भयभीत थे। इसी कारण उन्होंने सबसे पहले ब्राह्मणों को निशाना बनाया। विप्र समाज सबका हित सोचता है। हमने सभी वर्णों को रोजगार दिया। अपने लिए भिक्षाटन का मार्ग चुना। आरक्षण की परंपरा ने बुद्धि, विवेक पर संख्या बल को भारी कर दिया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा राघवदास आश्रम बरहज के महंत आंजनेय दास महाराज ने की। संचालन सुधाकर मिश्र ने किया। इस दौरान पवन उपाध्याय, पुनीत पाठक, देवव्रत दीक्षित, शिवाकांत तिवारी, सोनू पांडेय, ज्ञानेश्वर शुक्ला, आनंद तिवारी, चक्रधर शुक्ला, संजीव दुबे, हरविंदर शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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जातीय विभेद पर टूट रहा समाज, घातक
बरहज। क्षेत्र के बरांव गांव स्थित निर्माणाधीन पंचदेव मंदिर परिसर में शाम को विप्र समागम गोष्ठी का आयोजन किया गया। जहां वक्ताओं ने जातीय विभेद पर टूट रहे समाज पर क्षोभ प्रकट करते हुए राष्ट्र के लिए घातक बताया। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पूर्व प्रधानाचार्य गौरीशंकर दुबे ने कहा कि समाज में रहने वालों को स्वयं को जानने की जरूरत है। दूसरों की ओर उठने वाली अंगुली के बगल की तीन अंगुलियां अपनी ओर इशारा करती हैं। जनार्दन पांडेय ने कहा क िसमाज के स्वार्थी तत्व जातीय विभेद पैदा कर समाज को बांटना चाहते हैं। संचालन अजय पांडेय ने किया। गोष्ठी को प्रधान संघ उपाध्यक्ष समरनाथ यादव, प्रदीप पांडेय, सुधांशु प्रकाश पांडेय, सतीश यादव, प्रधान गुलाब पासवान, सतीश चंद्र पांडेय, अशोक पांडेय, नवीन तिवारी, श्रीराम पांडेय, पप्पू पांडेय, रामभरोसा सिंह, मृत्युंजय चौबे, चंदन आदि उपस्थित रहे।