पैकौली। सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया की असमय मौत से बचपन के दोस्त और पड़ोसी असहज हो गए हैं। चार दिन बाद भी वे इस दुखद समाचार पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। शिवानंद को याद करते हुए दोस्तों की आंखें छलक जाती हैं और उनके साथ बिताए गए पल बार-बार याद आते हैं।
दोस्तों ने बताया की शिवानंद बेहद मिलनसार और मददगार स्वभाव के थे। वह गांव के युवाओं और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते थे। अक्सर वह बेहतर रोजगार और उज्ज्वल भविष्य के लिए बाहर जाकर नौकरी करने की सलाह देते थे। दोस्तों ने बताया कि विदेश में नौकरी करने के बावजूद शिवानंद अपनी जड़ों से जुड़े रहे। जब भी घर आते थे तो अपने पिता रामजी चौरसिया के साथ खेती के कार्यों में हाथ बंटाते थे। गांव के सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने तक, वह हर जिम्मेदारी को पूरी लगन से निभाते थे।
पड़ोसियों का कहना है कि शिवानंद सभी के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति थे। उनकी सरलता, मधुर व्यवहार और लोगों से जुड़ने की कला ने उन्हें पूरे गांव का चहेता बना दिया था।
दोस्त बोले
दोस्त अजीत शाही ने बताया कि जब वह गांव में था तो हमारे पास ही रहता था। केवल अपने घर खाने और सोने जाता था।
अजय कुमार शाही ने बताया कि जब वह पुणे गया तो मिलकर गया और जिस दिन पानी के जहाज पर चढ़ा तो फोन कर कहा कि मेहनत सफल हो गई ।
राजन सोनकर ने कहा कि शिवानंद में अपने संस्कार गहरे थे। वह घर आकर पिताजी के साथ खेती भी करते थे और दोस्तों को भी समय देते थे।
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परिवार चाहता है आर्थिक मदद
पैकौली। शिवानंद चौरसिया के छोटे भाई रामप्रवेश चौरसिया ने सरकार से परिवार की आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि शिवानंद परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रामप्रवेश चौरसिया ने कहा कि उनके बड़े भाई विदेश में रहकर परिवार के बेहतर भविष्य के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। उनकी कमाई से ही बच्चों की पढ़ाई, माता-पिता की देखभाल और घर का खर्च चलता था। अब उनके निधन के बाद परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए ताकि वह अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें। साथ ही परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की व्यवस्था सरकार अपने स्तर से करे।
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तीन दिन से घर में नहीं जला चूल्हा, पड़ोसियों ने बच्चों को कराया भोजन
बृहस्पतिवार को शिवानंद की मौत की खबर आने के बाद से ही परिवार सदमे में है। शनिवार की शाम तक भी इस घर में चूल्हा नहीं जला था। पत्नी व मां की हालत तो रोते-रोते पागलों जैसी हो गई है। पिता रामजी चौरसिया हर आने जाने वालों को देख रहे हैं। कभी शिवानंद के दोनों बच्चों को संभालते हैं तो कभी आगंतुकों से बात करते हैं। भाई रामप्रवेश चौरसिया की भी ऐसी ही हालत है। पड़ोसियों ने बताया कि परिवार के बड़े सदस्य इतने दुखी है कि अन्न का एक दाना भी नहीं खाया। मां-दादी को रोता देख बच्चे भी सुबह रहे हैं। बड़ी मुश्किल से पड़ोसियों ने कुछ खिलाया है।