नहीं दे रहे मास्क की रकम, कैसे हो ड्रेस की सिलाई
सरकारी विभागों पर समूह की महिलाओं का लाखों रुपये बकाया
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कोविड-19 महामारी से बचाव में अहम भूमिका निभाने वाली समूह की महिलाओं के साथ अधिकारी अब छलावा कर रहे हैं। मास्क की बकाया रकम के भुगतान के लिए महिलाओं को परेशान किया जा रहा है। किसी समूह का ब्लॉक पर 50 हजार तो किसी का लाख रुपये तक बकाया है। पूंजी फंस जाने के चलते महिलाएं परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए ड्रेस सिलाई का काम नहीं कर पा रही हैं।
लॉकडाउन के दौरान जब दुकानों पर मास्क नहीं मिल रहे थे तब एनआरएलएम की ओर से गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मास्क, पीपीई कीट और सैनिटाइजर बनाने का काम शुरू कर दिया। कपड़ों से बने रंग-बिरंगे मास्क की डिमांड सरकारी विभागों में खूब रही। जिला प्रशासन ने एक मास्क की दर 13.60 रुपये निर्धारित कर दी। आवश्यकता के अनुसार महिलाएं विभागों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराती गईं, लेकिन जिम्मेदारों ने उनका भुगतान लटका दिया। किसी समूह की दो माह तो किसी की तीन माह की रकम बकाया है। पूंजी के अभाव में महिलाएं परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए ड्रेस सिलाई नहीं कर पा रहीं हैं। इस संबंध में उपायुक्त एनआरएलएम, विजय कुमार चौधरी का कहना है कि समूह की महिलाओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने विषम परिस्थितियों में अपने कौशल का परिचय देते हुए जन-जन तक मास्क पहुंचाने का कार्य किया है। संबंधित विभागों से बात कर उनका भुगतान शीघ्र कराने का प्रयास किया जाएगा।
15 अगस्त तक देनी होती है ड्रेस
शासन ने परिषदीय विद्यालय के बच्चों को ड्रेस आपूर्ति की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी है। जिले में इन विद्यालयों की संख्या 2615 है। महिलाएं आसपास के स्कूलों से संपर्क कर बच्चों की साइज की ड्रेस 15 अगस्त तक मुहैया कराती हैं।
दो लाख रुपये का बकाया
अप्रैल माह में बैतालपुर ब्लॉक को 14 हजार मास्क मुहैया कराई हूं। 13.60 रुपये की निर्धारित दर से समूह का दो लाख 20 हजार रुपये बकाया है। भुगतान के लिए एडीओ और बीडीओ से कहकर थक चुकी हूं, रोज आजकल कहकर दौड़ाया जा रहा है। पूंजी फंसने के चलते स्कूली बच्चों के ड्रेस सिलाई का काम शुरू नहीं कर पा रही हूं।
- विभा पांडेय, अध्यक्ष मां अंबे स्वयं सहायता समूह।
40 हजार रुपये हैं बकाया
मई में पथरदेवा ब्लॉक को तीन हजार मास्क दिए गए। जिसका अबतक एक भी रुपये भुगतान नहीं हुआ है। हमने पांच परिषदीय विद्यालय के बच्चों को ड्रेस मुहैया कराने की तैयारी की थी। धनाभाव के कारण कपड़े की खरीद नहीं हो पा रही है। एक माह में दो हजार ड्रेस तैयार करनी बड़ी चुनौती है।
- पूनम गुप्ता, स्वयं सहायता समूह पथरदेवा।