संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। खरीफ की प्रमुख फसल धान पककर तैयार है। कटाई के बाद रबी फसल गेहूं तथा अन्य की बुवाई शुरू हो जाएगी। फसलों में अधिकांश रोग बीज जनित व भूमि जनित होते हैं, जिनके कारण फफूंदी के बीजाणु आदि प्रावस्थाएं भूमि में उपस्थित रहती हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में फसल को संक्रमित कर उत्पादन प्रभावित करती हैं, जिनका नियंत्रण व रोकथाम भूमि व बीज शोधन से किया जा सकता है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी इरम ने बताया कि भूमि के कीटों दीमक, सफेद गिडार, सूत्र कृमि, कटवर्म गुझिया वीविल, आलू की सूडी, कद्दू का लाल कीट, अलीशूटबोरर आदि फसलों को क्षति पहुंचाते हैं। इनके नियंत्रण के लिए क्लोरपायरिफास 20 ईसी की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर या ब्यूवेरिया बैसियाना जैव कीटनाशी की 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर मात्रा में भूमिशोधन किया जाना चाहिए।
ट्राइकोडर्मा या ब्यवेरिया से भूकमिशोधन के लिए 2.5 किग्रा मात्रा को 50-60 किग्रा गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर किसी छायादार स्थान पर रखकर जूट के बोरे या कपडे़ से ढककर सात दिन तक छोड़ देना चाहिए। इसके बाद तथा बुवाई के सात दिन पूर्व इसे प्रति हेक्टेयर खेत में प्रयोग करना चाहिए। ट्राइकोडर्मा से भूमि शोधन करने से दलहनी फसलों गन्ना, अलसी, मक्का के उकठा रोग, रूट या स्टेम कालर राट, सब्जियों के डैंपिंग आफ दलहन तिलहन के बैक्टीरियल बिल्ट या ब्लाईट तथा गेहूं के आवृत्त या अनावृत्त कंडुआ, करनाल बंट से सुरक्षा होती है।