देवरिया। नेपाल में हुई बारिश की वजह से जिले की चारों नदियों उफान पर हैं। सरयू नदी में पिछले 24 घंटे में 1.45 मीटर बढ़ोतरी हुई है। विशुनपुर देवार के 12 मजरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। वहीं राप्ती नदी भी खतरे के निशान से महज महज 80 सेंटीमीटर नीचे है। इस नदी में भी दो दिन में लगभग दो मीटर की बढ़ोतरी हुई है।
बाढ़ खंड विभाग की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार सोमवार की शाम चार बजे बरहज में सरयू नदी का जलस्तर 67.45 मीटर दर्ज किया गया। रविवार शाम को नदी का जलस्तर 66 मीटर पर था। यहां खतरे का निशान 66.50 मीटर पर है। नदी यहां खतरे के निशान से 95 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं राप्ती नदी का जलस्तर भी रविवार शाम को 68.55 मीटर पर था, जबकि सोमवार शाम को जलस्तर 69.30 मीटर पर पहुंच गया है। राप्ती नदी पर यह खतरा बिंदु 70.50 मीटर पर है। नदी अब यहां खतरे के निशान से एक मीटर 20 सेंटीमीटर ही नीचे है। गोर्रा नदी भी रविवार को 68.95 मीटर पर बह रही थी। सोमवार की शाम चार बजे नदी का जलस्तर 69.65 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में 70 सेंटीमीटर की बढ़त हुई है। अब नदी खतरे के निशान 70.50 मीटर से 85 सेंटीमीटर ही नीचे बह रही है। छोटी गंडक नदी में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार को नदी का जलस्तर 62.30 मीटर पर था जो सोमवार की शाम चार बजे बढ़कर 62.90 मीटर पर पहुंच गया था।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता के हवाले से सहायक अभियंता उपेंद्र कुमार ने बताया कि नदियों के बढ़ने की रफ्तार अब धीमी पड़ रही है। अभी किसी बांध पर दबाव नहीं है।
विशुनपुर देवार के 12 मजरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू और राप्ती नदियों के उफनाने से विशुनपुर देवार के 12 मजरों तक नदी का पानी पहुंच गया है। वहीं भदिला प्रथम गांव टापू बना हुआ है। सोमवार की शाम तक सरयू के बाढ़ का पानी विशुनपुर देवार के कत्लहवा, बरमहवां, बांके, जवाहिर, स्कूलहिया आदि मजरों के पास तक पहुंचा है। नदी थाना घाट की सीढ़ियों से होकर बहने लगी है। कटइलवा-कपरवार संगम तट और बिनोवापुरी में नवीन तटबंध पर नदी दबाव बनाने लगी है। वहीं राप्ती के पानी से चारों ओर से घिरा होने के कारण टापू बने भदिला प्रथम गांव के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। बाढ़ से घिरे गांव के विनय, रामसरीखा, गरजू, रमाशंकर यादव आदि का कहना है कि नदी के उतार-चढ़ाव से दिल की धड़कनें तेज हो जा रही है। नदी के जलस्तर में बढ़त आने से 1998 की याद ताजा हो जा रही है।
पांचवीं बार सरयू नदी के जलस्तर में तेजी आ रही है। 24 घंटे में जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
ओमप्रकाश यादव विशुनपुर देवार
नदी के पीछे हटने से काफी राहत मिला था लेकिन अचानक सरयू का रौद्र डरा देने वाला है। 24 घंटे में नदी एक बार फिर मजरों तक पहुंच रही है। जिससे दुश्वारियां बढ़ गई है।
रिहाइशी इलाकों की तरफ बढ़ रही नदी
संवाद न्यूज एजेंसी
भागलपुर । सरयू नदी का तेवर अचानक उग्र हो चला है। रविवार की रात नदी खतरे का निशान पार कर अब रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगी है। नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो मंगलवार को देवरहा बाबा आश्रम के पास तक पानी पहुंच जाएगा। अब तटवर्ती गांवों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। नदी किनारे बसे गांवों में हलचल तेज हो गई है।
केंद्रीय जल आयोग तुर्तीपार के जेई स्वप्निल प्रजापति ने बताया कि मैदानी इलाकों और पहाड़ों में हुई बारिश का असर अब नदी में दिखने लगा है। आगे भी जलस्तर में वृद्धि हो का अनुमान है। कर्मचारियों को मीटर गेज पर निगरानी रखने को कहा गया है।
छोटी गंडक नदी के किनारे बसे ग्रामीण चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
भटनी। नेपाल से आने वाली छोटी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। रोजाना बढ़ रहे पानी को देखकर नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि, अभी नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रहने पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। ग्रामीण नदी के जलस्तर और आसपास के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
अहिरौली, बेलवा बाबू, फतेहपुर, सल्लहपुर, बनकटा शिव, डुमरी, वैद्य मिश्रौली, मिश्रौली दीक्षित, वीरसिंहपुर, पुरनाछापर, परसौनी, जिगिना दीक्षित, जिगिना मिश्र, कुरमौटा ठाकुर, लालचक, पिपरा विठ्ठल, बनकटा तिवारी और भरहेचौरा समेत कई गांव नदी के आसपास बसे हैं। इन गांवों के लोगों का कहना है कि सितंबर और अक्तूबर में छोटी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ना क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।नदी में पानी बढ़ने से खेतों में पानी पहुंचने और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2001 में छोटी गंडक नदी में आई बाढ़ का असर लंबे समय तक रहा था। उस समय नदी का पानी बढ़ने से आसपास के गांवों में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि इस समय नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि को लेकर ग्रामीण पहले से ही सतर्क हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहा और नेपाल की ओर से नदी में पानी बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।