फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SDM Yogesh Kumar Gaur: पहली तैनाती में मिले कदाचार के दोषी, सीएम को धमकी देने वाले को दी थी जमानत

Wed, 11 Oct 2023 11:32 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।

सार

एसडीएम योगेश कुमार गौड़ इसी वर्ष अप्रैल माह में पीलीभीत से स्थानांतरित होकर जनपद में आए थे। कुछ दिनों तक सदर एसडीएम रहे, इसके बाद रुद्रपुर तैनात हो गए। पूर्व में तैनाती के दौरान पीलीभीत में भूमि के विवाद में फंसने पर चर्चा में आए थे।
विज्ञापन
SDM Yogesh Kumar Gaur - फोटो : X- @YogeshK82569179
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देवरिया जिले में फतेहपुर सामूहिक हत्याकांड के बाद निलंबित किए गए एसडीएम योगेश कुमार गौड़ का विवादों से पुराना नाता रहा है। अपनी पहली तैनाती में ही कदाचार के दोषी पाए जा चुके हैं। पीलीभीत में जमीन के विवाद में फंसने के बाद उनका रुद्रपुर तबादला किया गया था। यहां पर उन्होंने मुख्यमंत्री को धमकी देने वाले को पलभर में जमानत दे दी थी। इसके बाद अब फतेहपुर कांड में भी लापरवाही पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।

विज्ञापन


एसडीएम योगेश कुमार गौड़ इसी वर्ष अप्रैल माह में पीलीभीत से स्थानांतरित होकर जनपद में आए थे। कुछ दिनों तक सदर एसडीएम रहे, इसके बाद रुद्रपुर तैनात हो गए। पूर्व में तैनाती के दौरान पीलीभीत में भूमि के विवाद में फंसने पर चर्चा में आए थे। वहां 15 करोड़ की जमीन कालोनाइजरों के नाम करने का आरोप लगा था।

वहीं, देवरिया सदर एसडीएम रहते हुए मुख्यमंत्री को धमकी देने वाले आरोपी को पल भर में जमानत दे दी थी। इतना ही नहीं एक दायर वाद में एक ही तिथि को दो आदेश कर दिए थे। जिसकी जांच एडीएम प्रशासन को सौंपी गई है।
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: पहले गोली बरसाईं... फिर दम तोड़ने तक तीनों को बट से पीटता रहा; प्रेम के ड्राइवर का चौंकाने वाला खुलासा

पीलीभीत में पहली तैनाती के दौरान योगेश कुमार गौड़ ने राजस्व अभिलेखों में राज्य सरकार के नाम दर्ज करीब 15 करोड़ रुपये की कामर्शियल संपत्ति (सरकारी तालाब) के मुकदमे में प्रभावित पक्षकार राज्य सरकार को सुने बिना ही एक ऐसे एक्ट के तहत फैसला सुना दिया, जो वर्ष 2016 से उत्तर प्रदेश में निरसित (समाप्त) घोषित है। शिकायत पर शासन ने जांच कराई तो पीलीभीत के प्रकरण में एसडीएम को न्यायिक कदाचार का दोषी करार दिया गया।

Trending Videos

मामले की शिकायत माह अप्रैल 2022 में पीलीभीत के निर्मल कांत शुक्ला व विभव कुमार शर्मा ने शासन से की थी। बताया था कि पीलीभीत शहर में प्राइम लोकेशन पर गाटा संख्या 597 पर स्थित तालाब की जमीन कारोबारी ने पाट ली है। पीलीभीत सदर के तत्कालीन तहसीलदार राजेश कुमार शुक्ला ने जांच करने के बाद 15 सितंबर 2021 को आदेश पारित कर खतौनी में तालाब वाली जगह को राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज कर दिया।

इसे भी पढ़ें: दोनों पक्षों से मिला सपा का प्रतिनिधिमंडल, बैरियर पर पुलिस ने रोका, बहस के बाद पहुंचा गांव

तहसीलदार के इस आदेश पर जमीन कारोबारी ने उप जिलाधिकारी सदर को एक जनवरी 2022 को प्रार्थना पत्र देकर आपत्ति की थी। उप जिलाधिकारी ने उस प्रार्थना पत्र को ही न्यायालय में वाद के रूप में रोहित राजानी बनाम सरकार के रूप में उत्तर प्रदेश भू राजस्व अधिनियम 1901 की धारा विविध के अंतर्गत दर्ज कर लिया और 11 मार्च 2022 को रोहित राजानी के हक में फैसला सुनाते दिया। जबकि यह अधिनियम उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के 11 फरवरी 2016 को प्रभावी होने के बाद संपूर्ण उत्तर प्रदेश में निरसित घोषित कर दिया गया था।

शिकायतकर्ताओं ने एसडीएम सदर की मिलीभगत की बात कहते हुए इसे न्यायिक कदाचार का गंभीर मामला बताया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर जांच पीलीभीत के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राम सिंह गौतम ने की। जांच अधिकारी ने एसडीएम सदर योगेश कुमार गौड़ से शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगा था। उनके स्पष्टीकरण पर पीलीभीत के जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) देश दीपक मिश्रा से परीक्षण कर आख्या मांगी तो इस जांच में योगेश कुमार गौड़ को न्यायिक कदाचार का दोषी माना गया था। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। शासन स्तर पर नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के पास अग्रिम कार्रवाई के लिए पत्रावली लंबित पड़ी है।

इसे भी पढ़ें: देवरिया सामूहिक हत्याकांड: प्रेम के वकील ने पैमाइश पर लगाई आपत्ति, फैसला आज

नियुक्ति विभाग में दबी पड़ी है पत्रावली

पीलीभीत के प्रकरण में वहां के एडीएम की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को मिलने के बाद न्यायिक कदाचार के दोषी पीसीएस अधिकारी योगेश कुमार गौड़ के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को माह जून 2022 में पत्रावली भेजी गई थी। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने शिकायतकर्ताओं के शपथ पत्र भी ले लिए लेकिन एक साल बाद भी पीलीभीत प्रकरण में पीसीएस अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसे भी पढ़ें: देवरिया सामूहिक हत्याकांड: प्रेम यादव ने सिर्फ 21 लाख में लिखवा ली थी 1.30 करोड़ की जमीन, नवनाथ बना था गवाह

एक तिथि पर ही सुना दिए दो फैसले
देवरिया शहर के देवरिया रामनाथ मोहल्ला निवासी शिवनारायण तिवारी ने शिकायत की थी कि नरेंद्र, योगेंद्र और वीरेंद्र का नाम फर्जी इंद्राज के जरिए चढ़ गया है। इस मामले की जांच सीआरओ ने की तो शिकायत सही पाई गई। इसको लेकर एक वाद एसडीएम कोर्ट में दाखिल हुआ। 17 अगस्त 2023 को आदेश किया गया। इसमें एक ही तिथि को पक्ष और विपक्ष दोनों के पक्ष में फैसला सुना दिया गया। इसमें दोनों पक्षों को सही ठहरा दिया गया।

इसे भी पढ़ें: देवरिया सामूहिक हत्याकांड: बुलडोजर तो चलेगा... पर कब और कैसे, इस पर सबकी निगाह; फूंक-फूंककर कदम रख रहे अफसर
विज्ञापन

मुख्यमंत्री को धमकी देने वाले को दे दी थी जमानत
जुलाई माह में एक व्यक्ति ने डायल 112 पर फोन कर बताया कि नौकरी नहीं मिली है। मैं मुख्यमंत्री को जान से मार दूंगा। इस मामले में पुलिस ने गोरखपुर जिले के हरपुरबुदहट थाना क्षेत्र के देवडार गांव निवासी संजय को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने शांतिभंग में चालान कर एसडीएम कोर्ट में पेश किया तो उसे तुरंत ही जमानत मिल गई। इसको लेकर जब किरकिरी हुई तो पुलिस उसे फिर से घर से उठाकर लाई। इसके बाद एसडीएम ने जेल भेजा।




 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें