मामले की शिकायत माह अप्रैल 2022 में पीलीभीत के निर्मल कांत शुक्ला व विभव कुमार शर्मा ने शासन से की थी। बताया था कि पीलीभीत शहर में प्राइम लोकेशन पर गाटा संख्या 597 पर स्थित तालाब की जमीन कारोबारी ने पाट ली है। पीलीभीत सदर के तत्कालीन तहसीलदार राजेश कुमार शुक्ला ने जांच करने के बाद 15 सितंबर 2021 को आदेश पारित कर खतौनी में तालाब वाली जगह को राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज कर दिया।
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तहसीलदार के इस आदेश पर जमीन कारोबारी ने उप जिलाधिकारी सदर को एक जनवरी 2022 को प्रार्थना पत्र देकर आपत्ति की थी। उप जिलाधिकारी ने उस प्रार्थना पत्र को ही न्यायालय में वाद के रूप में रोहित राजानी बनाम सरकार के रूप में उत्तर प्रदेश भू राजस्व अधिनियम 1901 की धारा विविध के अंतर्गत दर्ज कर लिया और 11 मार्च 2022 को रोहित राजानी के हक में फैसला सुनाते दिया। जबकि यह अधिनियम उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के 11 फरवरी 2016 को प्रभावी होने के बाद संपूर्ण उत्तर प्रदेश में निरसित घोषित कर दिया गया था।
शिकायतकर्ताओं ने एसडीएम सदर की मिलीभगत की बात कहते हुए इसे न्यायिक कदाचार का गंभीर मामला बताया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर जांच पीलीभीत के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राम सिंह गौतम ने की। जांच अधिकारी ने एसडीएम सदर योगेश कुमार गौड़ से शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगा था। उनके स्पष्टीकरण पर पीलीभीत के जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) देश दीपक मिश्रा से परीक्षण कर आख्या मांगी तो इस जांच में योगेश कुमार गौड़ को न्यायिक कदाचार का दोषी माना गया था। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। शासन स्तर पर नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के पास अग्रिम कार्रवाई के लिए पत्रावली लंबित पड़ी है।
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एक तिथि पर ही सुना दिए दो फैसले
देवरिया शहर के देवरिया रामनाथ मोहल्ला निवासी शिवनारायण तिवारी ने शिकायत की थी कि नरेंद्र, योगेंद्र और वीरेंद्र का नाम फर्जी इंद्राज के जरिए चढ़ गया है। इस मामले की जांच सीआरओ ने की तो शिकायत सही पाई गई। इसको लेकर एक वाद एसडीएम कोर्ट में दाखिल हुआ। 17 अगस्त 2023 को आदेश किया गया। इसमें एक ही तिथि को पक्ष और विपक्ष दोनों के पक्ष में फैसला सुना दिया गया। इसमें दोनों पक्षों को सही ठहरा दिया गया।
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मुख्यमंत्री को धमकी देने वाले को दे दी थी जमानत
जुलाई माह में एक व्यक्ति ने डायल 112 पर फोन कर बताया कि नौकरी नहीं मिली है। मैं मुख्यमंत्री को जान से मार दूंगा। इस मामले में पुलिस ने गोरखपुर जिले के हरपुरबुदहट थाना क्षेत्र के देवडार गांव निवासी संजय को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने शांतिभंग में चालान कर एसडीएम कोर्ट में पेश किया तो उसे तुरंत ही जमानत मिल गई। इसको लेकर जब किरकिरी हुई तो पुलिस उसे फिर से घर से उठाकर लाई। इसके बाद एसडीएम ने जेल भेजा।