पानी के रिसाव से खोखली हो रहीं सड़कें
देवरिया। पानी चाहिए तो सड़क की सुविधा को भूलना पड़ेगा। जर्जर पेयजल पाइप लाइनें शहर की सड़कों के लिए काल बन गई हैं। पाइपलाइन फटने के बाद उसकी मरम्मत के लिए सड़कों को खोदा जाता है। जिससे गल्ली-मोहल्लों की सड़कों पर कई गड्ढे बन गए हैं। अब मुख्य मार्ग भी इससे अछूते नहीं रहे। फोरलेन से लगायत सीसी रोड तक पाइप से हो रहे पानी रिसाव के चलते सड़कें जगह-जगह खोखली हो रही हैं। शनिवार के दिन जलकल को चार जगह पाइप लीकेज की सूचना मिली थी।
दो माह पहले बनकर तैयार हुए सीसी रोड पर पेयजल पाइप फटने से तीन जगहों पर रिसाव हो रहा है। एक लिकेज कान्वेंट स्कूल के पास है तो दो लीकेज हनुमान मंदिर से दक्षिण सड़क के बीचोबीच हैं। जलकल के कर्मचारी पीडब्लूडी से एनओसी के इंतजार में हैं। पीडब्ल्यूडी अनापत्ति प्रमाण पत्र देगा तो जलकल कर्मचारी सड़क की खुदाई कर पाइप की मरम्मत करेंगे।
चौथा लीकेज एसपी आफिस के निकट फोरलेन पर हुआ था। एक साथ चार जगहों पर पाइप फटने का मामला एक दिन का नहीं है। आए दिन चार से पांच जगहों पर पेयजल पाइप लीकेज की समस्या उत्पन्न होती है। जलकल कर्मचारी सड़क की खुदाई कर लीकेज बनाते हैं और गड्ढों को मिट्टी से पाटकर चले जाते हैं। नगर पालिका उन सड़कों की पैचिंग तक नहीं कराती। न्यू कालोनी, साकेतनगर, छहमुखी चौराहा, शहीद नगर, अली नगर, नाथ नगर, भटवलिया, सिंधी मिल आदि मोहल्लों में लिकेज की समस्या अधिक है।
भारी वाहनों के दबाव से उत्पन्न हो रही समस्या
शहर में करीब सौ किमी पेयजल पाइप लाइन का विस्तार हुआ है। इसमें 40 किलोमीटर पाइप अमृत योजना से बिछाई गई है। विवाद से बचने के लिए जल निगम ने पाइप लाइन का विस्तार सड़क के बीच में करा दिया है। पुरानी लाइनें जो किनारे थीं, वह सड़क चौड़ीकरण के बाद बीच में आ गई हैं। भारी वाहनों की आवाजाही से पड़ रहे दबाव के चलते पाइप फटने और लिकेज की समस्या उत्पन्न हो रही है।
जलकल अनुभाग के पास नहीं है पाइप लाइन का नक्शा
जलकल अनुभाग के पास शहर में बिछाई गई पेयजल पाइप लाइन का नक्शा ही नहीं है। लीकेज बनाने के दौरान उन्हें पता नहीं चल पाता कि पाइप सड़क के किस साइड में बिछाई गई है। अंदाजे वह जरूरत से ज्यादा सड़क की खुदाई कर देते हैं। बाद में वहां बड़ा गड्ढा बन जाता है।
पहले शहर में पाइप लाइन लीकेज की समस्या बहुत ज्यादा थी। अब इसमें काफी सुधार किया गया है। ज्यादातर पाइप लाइन सड़क के नीचे से बिछाई गई है। ओवरलोड वाहनों की आवाजाही के चलते पाइप ज्यादा फटते हैं। - अमरेंद्र प्रताप सिंह, जेई जलकल।