- वर्ष 1998 से बहोरा दलपतपुर को निगल रही गोर्रा नदी, नींव तक पहुंचा पानी,
- खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर नीचे गोर्रा
रुद्रपुर। खतरे के निशान के करीब पहुंची गोर्रा नदी का बहोरा दलपतपुर गांव में कहर शुरू हो गया है। लाल निशान से महज 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही नदी की धारा सीधे मकानों से टकरा रही है। बुधवार को कई घरों की नींव तक पानी पहुंचने के बाद ग्रामीण सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। नदी का रौद्र रूप देख गांव में दहशत का माहौल है।
गोर्रा नदी वर्ष 1998 से बहोरा दलपतपुर को लगातार नुकसान पहुंचा रही है। 1998 और 2001 की बाढ़ में कई मकान कटकर नदी में समा गए थे। अब फिर नदी की धारा घरों की ओर बढ़ने से ग्रामीण पुराने भयावह मंजर को याद कर सहम उठे हैं।
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बार-बार उजड़ रहा गांव, पीछे हटकर बसने पर भी नहीं थमा खतरा
नदी की कटान के चलते ग्रामीणों को कई बार घर छोड़कर दूसरी जगह बसना पड़ा है। अवधेश मिश्रा हनुमान, विश्वनाथ, संजय राव, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र मिश्र और राधेश्याम के दो-दो मकान पहले ही नदी में समा चुके हैं। कई परिवार गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं।
श्रीराम यादव ने बताया कि 27 वर्षों से ग्रामीण नदी के प्रकोप का सामना कर रहे हैं। हर साल एक-दो मकान कटान की चपेट में आ जाते हैं। राजेंद्र सिंह ने कहा कि तटबंध और नदी के बीच बसे गांवों को बचाने के लिए ठोस योजना नहीं बनाई गई है।
राधेश्याम मिश्र के अनुसार करीब 13 लोगों के मकान दोबारा नदी की जद में हैं और पानी तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो गांव का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
विभाग तटबंधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा रहा है। तटबंध और नदी के बीच बसे लोगों के मकानों को बचाने की कोई योजना सिंचाई विभाग के पास नहीं है। इसके लिए शासन स्तर से विशेष प्रयास करना होगा।
- राधेश्याम, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग