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माता-पिता और राष्ट्र की सेवा करने वाले ही सच्चे अर्थों में हैं युवा
जिगिना मिश्र में श्रीमद्भागवत कथा में बोले स्वामी रामभद्राचार्य
अमर उजाला ब्यूरो
भटनी। पद्मविभूषण से सम्मानित कथाव्यास स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र के लिए कुछ जरूर करना चाहिए। जब राष्ट्रहित की बात आती है तो सारे सुखों की तिलांजलि देनी पड़ती है। व्यक्तिगत सुखों की तिलांजलि से राष्ट्र प्रेम होता है। भारत का प्रत्येक युवक देश का सैनिक है। राष्ट्र के यज्ञ में जो भूमिका निभाए वही पत्नी है। अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और देश की सेवा पूरी ईमानदारी से करनी चाहिए। देवता की उपासना करें या न करें पर माता-पिता, अतिथि और देश का अपमान नहीं करना चाहिए। वह रविवार को जिगिना मिश्र में जय दुर्गा सेवा न्यास समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत में क्षेत्र के आसपास से आए श्रद्धालुओं को कथा सुना रहे थे।
जगद्गगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कथा के अंतिम दिन अत्याचारी कंस, जरासंध और शिशुपाल वध, राधा के साथ भगवान का वियोग और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। कथा सुनकर लोग बार-बार आनंदमय होते हुए और पंडाल नमो राघवाय से बार-बार गूंजता रहा। कथाव्यास ने आगे कहा कि कुछ कथाकार राधा को भगवान की प्रेमिका कहते हैं, जो गलत है। रा का मतबल राष्ट्र और धा का अर्थ धारण और पोषण करने वाला होता है, अर्थात राष्ट्र का जो पोषण करें, उसका नाम राधा है। राधा जी के त्याग की भरपाई नहीं की जा सकती। राधा ने पूरी जिंदगी कृष्ण की याद में बिता दिया। रासलीला के बाद जब भगवान राधा को वंशी देकर सुदर्शन चक्र लेकर जाते हैं तो राधा कहती हैं कि सौ वर्षों के त्याग के बाद हम फिर मिलेंगे। तब तक आप इस संसार को हिंसा मुक्त कर देना। जब से कन्हैया गए राधा ने अन्न का सेवन नहीं किया। एक बार उनकी अंगुली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़ बांधती है। भगवान बाद में द्रोपदी की लाज बचा इसकी मान रखते हैं। इस अवसर पर आचार्य रामचंद्र दास, प्रभाकर मिश्र, गौतम मिश्र, शिवाकांत मिश्र, पवन मिश्र, कमलेश मिश्र, सुधाकर मिश्र, गिरधारी तिवारी, इंदुशेखर मिश्र, संजय मिश्र, सुशील मिश्र, उमेश नाथ तिवारी आदि मौजूद रहे।