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Deoria News: स्थानीय युवाओं की मदद से पशुओं की खरीदारी... धंधेबाज भेजते हैं बंगाल

Sun, 11 May 2025 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
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देवरिया। गोवंश तस्कर धंधे में संलिप्त स्थानीय युवकों की सेटिंग से पहले पशुओं की वजन के अनुसार खरीदारी करते हैं। जिस पशु का जितना ज्यादा वजन होता है, उसकी उतनी ही अधिक रकम लगती है।
फिर मौका देखकर पिकअप से पशुओं को बॉर्डर के रास्ते बिहार की सीमा में दाखिल हो जाते हैं। इसके बाद गोपालगंज सिवान के रास्ते बंगाल भेज देते हैं।
तस्कर एक गोवंश की खरीद पांच से 10 हजार में करते हैं।
तस्करों को तीन से चार गुना तक मुनाफा होता है। पुलिस तस्करों पर नकेल कसने के लिए लगातार कार्रवाई कर इनके फैले नेटवर्क को तोड़ने में लगी है। बावजूद इसका असर नहीं दिख रहा है।
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जिले में गोवंश तस्कर सक्रिय हैं। धंधे में बेरोजगार युवकों के इस्तेमाल करने की भी सूचना है। सूत्र बताते हैं कि ये युवक जिले के अलग-अलग गांवों में घूमकर पालकों के दरवाजे पर जाकर पहले पशुओं का मोल भाव करते हैं।
सबसे पहले उन पशुओं को देखते हैं जो बच्चे को जन्म नहीं दे पाती है। ऐसे पशु शरीर से तगड़े होते हैं। इनकी मांग अधिक होती है।वहीं बीमार गाय की सबसे कम कीमत लगती है। इन गायों को पशुपालक के यहां चिह्नित कर छोड़ देते हैं।
तस्कर गायों को देखने के बाद रुपये देकर चले जाते हैं। शुक्रवार और रविवार को धंधे में संलिप्त युवा इन्हें रात दो से तीन बजे रात के बीच में गांव के बाहर लगी पिकअप के पास पहुंचा देते हैं।
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यहां से पशुओं को भरकर जिले के अलग-अलग रास्तों से तस्कर निकलते हैं। वाहन के आगे लाइनर चलते हैं, जो रास्ते की लोकेशन देते रहते हैं।
पशुओं से भरे वाहनों की रफ्तार इतनी तेज रहती है कि पीछा करना मुश्किल होता है। तस्कर जिले के बरियारपुर-सलेमपुर से फुलवरिया चौराहा के रास्ते बनकटा थाना क्षेत्र, रामजानकी मार्ग से पिपरा चौराहा लार भाटपार रानी मार्ग के रास्ते चनुकी घाट होते हुए बिहार की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं।
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