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Deoria News: ज्यादा न चलना पड़े ट्रैक पार करते हैं यात्री

Thu, 07 Mar 2024 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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गतिशक्ति प्रोजेक्ट में चयनित है देवरिया रेलवे स्टेशन
सेंसर सिस्टम से चलता है एस्केलेटर, खुद ही हो जाता है बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रेलवे स्टेशन पर बुधवार दोपहर करीब तीन बजे हावड़ा एक्सप्रेस रुकी और आगे निकल गई तो लोग बैग लेकर रेलवे लाइन पर उतरने लगे। जिधर देखिए, उधर लोग लाइन पार करते दिखे। कुछ लोग लाइन से प्लेटफाॅर्म पर चढ़ रहे थे तो ऊपर वाले हाथ पकड़कर उन्हें उठाने का सहयोग कर रहे थे। ये सभी लोग कम दूरी तक ही सामान ढोने की कोशिश में जोखिम माेल रहे थे। मौके पर मौजूद एक पुलिस कर्मी ने कहा कि इस स्टेशन पर जब भी ट्रेन आती है तो इसी तरह का दृश्य नजर आता है।
हावड़ा एक्सप्रेस प्लेटफाॅर्म नंबर तीन पर रुकी थी तो ट्रेन से उतरने वाले लाइन पार करते हुए प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर आ रहे थे। इनमें कुछ लोगों के पास बैग थे तो कुछ महिलाएं थीं, जो बच्चों को लेकर लाइन पार करते दिखीं। उन्हें न तो कोई टोकने वाला था और न उनकी खुद की समझ ऐसी थी कि वे जोखिम से बचने की कोशिश करें।
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उत्तराखंड के रुद्रपुर से आए दो युवकों ने भी लाइन पार किया तो इनमें देवरिया के रामगुलाम टोला जाने वाले बृजेश ने कहा कि उन्होंने लोगों को लाइन पार करते हुए देखा तो इधर-उधर देखकर सोचा कि ट्रेन नहीं आ रही है तो पटरी पा कर लें। हालांकि, बात करने पर उन्होंने अहसास किया कि कुछ गलती हो गई है। इसके बाद बिहार की ओर से मौर्या एक्सप्रेस आई तो भी इसी तरह का नजारा दिखा।
देवरिया रेलवे स्टेशन गतिशक्ति प्रोजेक्ट में चयनित है। इसमें 32 करोड़ रुपये से देवरिया, भटनी और सलेमपुर सहित बिहार के थावे स्टेशन को मॉडल बनाया जा रहा है। कार्य अधर में होने के कारण यात्रियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्टेशन पर एक्सप्रेस और पैसेंजर सहित 100 ट्रेनों का आना-जाना होता है। जबकि मालवाहन 120 से अधिक ट्रेनें स्टेशन से गुजरती हैं। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 6000 यात्री स्टेशन से आते-जाते हैं।

ट्राॅली बैग से भी सामना ले जाना कठिन
प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर रास्ता ऊबड़-खाबड़ है। एक महिला और बच्ची के साथ जा रहे गौरीबाजार के बसंतपुर निवासी राजू ट्राॅली बैग खींचते हुए आए तो प्लेटफाॅर्म पर टूटे रास्ते पटरी के किनारे कुछ अच्छे-रास्ते पर चलना शुरू किया, क्योंकि ऊबड़-खाबड़ सड़क पर ट्राॅली बैग ले जाना कठिन है।
राजू ने बताया कि बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य भले ही चल रहा है, लेकिन प्लेटफाॅर्म के गड्ढे तो भर दिया जाना चाहिए। ट्राॅली बैग का चलन बढ़ा तो महिलाएं भी कुली नहीं करती हैं, लेकिन एस्केलेटर और लिफ्ट की सुविधा नहीं होगी तो दिक्कत होगी ही।
कुशीनगर के राजकिशोर शर्मा भी ट्रेन की सवारी शुरू करने के लिए स्टेशन पर पहुंचे तो उन्होंने कहा कि स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव है। हालांकि, लोगों को रेलवे लाइन नहीं पार करना चाहिए।


... और कूदते ही बंद हो जाता है एस्केलेटर
रेलवे स्टेशन पर करीब आठ माह पहले एक एस्केलेटर बनाया गया है, लेकिन इसका जेनरेटर नहीं आया है। जब बिजली रहती है तो इसकी सीढि़यां चलती रहती हैं। एक रेलकर्मी ने बताया कि एस्केलेटर में सेंसर सिस्टम है। 8-10 मिनट कोई यात्री नहीं आता है तो वह बंद हो जाता है। कोई यात्री सामने आ जाए तो चलने लगता है। इसके साथ ही इस पर बच्चे खेलते भी हैं, जब सीढ़ी पर बच्चे कूदते हैं तो भी बंद हो जाता है। इसकी जानकारी आम यात्रियों को नहीं है। इसी कारण बिजली रहती है तो भी एस्केलेटर को लोग बंद मान लेते हैं। जबकि यदि बत्ती जल रही है तो यात्रियों के जाते ही सीढ़ी चलने लगती है। एक ओर एस्केलेटर है, जबकि दूसरी ओर लिफ्ट बनाने का कार्य शुरू होने वाला है।
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रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव है। एस्केलेटर अक्सर बंद रहता है। लिफ्ट भी नहीं है। प्लेटफाॅर्म पर ट्राॅली बैग खींचने में भी परेशानी हो रही है।
-राजेश कुमार, यात्री गोरखपुर

रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाएं पूरी होनी चाहिए। महिलाएं कोशिश करती हैं कि ट्राॅली बैग से अपना सामान खुद ले जाएं और कुली का सहारा न लेना पड़े।
-सरस्वती राय, नैनीताल, यात्री
वर्जन
देवरिया रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। तीन माह में यात्री सुविधाएं बेहतर हो जाएंगी। 12 मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज बनाया जाएगा। इसमें लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधा भी होगी। यात्री हाॅल के साथ पार्किंग सुविधा भी बेहतर हो जाएगी।

-आई अंसारी, स्टेशन अधीक्षक
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