वाहन में ठूंस कर बिठाए गए बच्चे।
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देवरिया। विद्यालयों में चलने वाले वाहन मानक को दरकिनार कर भर्राटा भर रहे हैं। अधिकांश बसों में अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है। बच्चे भरे होने के चलते विभागीय जिम्मेदार भी इन बसों पर ध्यान नहीं देते हैं। इसका फायदा उठाते हुए स्कूल संचालक बस में सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही बरतते हैं।
वैसे तो जिले में 200 से अधिक निजी विद्यालय हैं, जहां पढ़ने वाले बच्चे स्कूल आने-जाने के लिए बस का सहारा लेते हैं। शहर में यह संख्या 25 से अधिक है। बसों के रजिस्ट्रेशन के समय आरटीओ से मानक तय किया जाता है। बस जितने सीट में पास होती है, उतने ही बच्चों को इसमें बैठाना होता है। हर स्कूल वाहन या अन्य वाहन में अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स लगा होना चाहिए ताकि किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके। इन बसों में निर्धारित सीट से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है।
कुछ बसों में बच्चों को स्टैंडिंग में आते-जाते देखा जा सकता है। यही नहीं ये बसें बीच सड़क पर जहां मर्जी बस रोककर बच्चों को उतारने-चढ़ाने लगते हैं। कभी-कभी शहर में इनकी वजह से जाम की स्थिति हो जाती है। चूंकि बसों में बच्चे बैठे होते हैं, इसलिए टीएसआई भी इन पर ध्यान नहीं देते हैं। विभागीय अधिकारियों की इस कमजोरी का फायदा स्कूल संचालक उठा रहे हैं। उनको इस बात का अंदाजा नहीं है कि उनकी थोड़ी सी लापरवाही बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए कितनी भारी पड़ सकती है।