शहर के देवरिया-सलेमपुर मार्ग पर जेल रोड के पास तीन कट्ठे की एक विवादित भूमि पर कब्जा जमा लिया। इसकी कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक है। इसी बीच ज्ञानप्रकाश दूबे से मुलाकात के बाद उसकी किस्मत खुल गई।
ग्रामीणों के अनुसार, ज्ञानप्रकाश बाहर कमाते थे। जब वह घर आए तो दरवाजे पर कदम रखते ही उनका विवाद सत्यप्रकाश की पत्नी से हो गया। इसी के बाद ज्ञानप्रकाश अपनी बहन के घर चले गए और कुछ दिन बाद प्रेम की शरण में आ गए। वहां आदर मिला तो ज्ञानप्रकाश खुश रहने लगे।
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इसी का फायदा उठाकर प्रेम ने उनकी पूरी जमीन अपने नाम करा ली। इतना ही नहीं, लेड़हा टोला की दस बीघा और केहुनिया की पूरी संपत्ति पर अपना कब्जा जमा लिया। ग्राम प्रधान का पद परिवार में होने के कारण गांव की सरकारी जमीनों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया। इसके चलते वह कई करोड़ की जमीन का मालिक बन गया।