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देवरिया हत्याकांड: प्रेम ने प्रधानी के रसूख से अफसरों में पैठ बनाईए शातिर चालों से अवैध संपत्ति जुटाई

Fri, 06 Oct 2023 01:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।

सार

पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव का परिवार पहले से ही राजनीति में सफल था। मां प्रधान रह चुकी हैं। इसके कारण उसे भी राजनीति का चस्का लग गया। इसके बाद उसने खुद ही परिवार की विरासत संभाली और जिला पंचायत सदस्य बन गया। लोगों से व्यवहार बनाकर विश्वास में ले लेता था। अपनी जरूरत के हिसाब से उनका उपयोग करता था।
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मृतक पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
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देवरिया में सामूहिक हत्याकांड के बाद अब हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है। चर्चा के केंद्र में यह बर्बर कांड तो है ही, लोग बहुत कम समय में प्रेम यादव के शोहरत-दौलत हासिल कर लेने पर भी हैरानी जता रहे हैं। चर्चा की मानें तो प्रेम ने प्रधानी के रसूख से अफसरों में पैठ बनाने में सफल रहा। उसके बाद अपनी शातिर चालों से दूसरों व सरकारी जमीन को हथियाकर खूब अवैध संपत्ति जुटाई।

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दरअसल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव का परिवार पहले से ही राजनीति में सफल था। मां प्रधान रह चुकी हैं। इसके कारण उसे भी राजनीति का चस्का लग गया। इसके बाद उसने खुद ही परिवार की विरासत संभाली और जिला पंचायत सदस्य बन गया।

लोगों से व्यवहार बनाकर विश्वास में ले लेता था। अपनी जरूरत के हिसाब से उनका उपयोग करता था। प्रेम यादव ने राजनीति में सफल होने के बाद अपना रुतबा बढ़ा लिया। घर पर हातानुमा मकान बनवाकर साथ में छप्पर का बंगला भी तैयार कराया और वहां बैठकबाजी शुरू कर दी।
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समाजवादी पार्टी की राजनीति करने के नाते उसका जिला मुख्यालय पर आना-जाना शुरू हुआ और वहां भी उसने पकड़ बना ली। सूत्रों के मुताबिक, धीरे-धीरे उसने अवैध प्राॅपर्टी डीलिंग का काम करने वालों से दोस्ती गांठ ली और उन्हें संरक्षण देकर मोटी रकम भी कमा ली।

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शहर के देवरिया-सलेमपुर मार्ग पर जेल रोड के पास तीन कट्ठे की एक विवादित भूमि पर कब्जा जमा लिया। इसकी कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक है। इसी बीच ज्ञानप्रकाश दूबे से मुलाकात के बाद उसकी किस्मत खुल गई।

ग्रामीणों के अनुसार, ज्ञानप्रकाश बाहर कमाते थे। जब वह घर आए तो दरवाजे पर कदम रखते ही उनका विवाद सत्यप्रकाश की पत्नी से हो गया। इसी के बाद ज्ञानप्रकाश अपनी बहन के घर चले गए और कुछ दिन बाद प्रेम की शरण में आ गए। वहां आदर मिला तो ज्ञानप्रकाश खुश रहने लगे।

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इसी का फायदा उठाकर प्रेम ने उनकी पूरी जमीन अपने नाम करा ली। इतना ही नहीं, लेड़हा टोला की दस बीघा और केहुनिया की पूरी संपत्ति पर अपना कब्जा जमा लिया। ग्राम प्रधान का पद परिवार में होने के कारण गांव की सरकारी जमीनों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया। इसके चलते वह कई करोड़ की जमीन का मालिक बन गया।
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