घटना को दबाने के लिए गांव में दो दिन चली पंचायत
पीड़ित परिवार के गरीब होने से उन्हें दबाने की हर संभव कोशिश की गई। दो दिनों तक लगातार गांव में चोरी-चुपके पंचायत चलती रही। इसकी भनक इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह को लगी तो वह स्वयं मामले की जांच-पड़ताल में जुट गए और पीड़िता से बातचीत कर घटना की जानकारी ली। इसके बाद प्रधान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है। उधर, घटना को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस सक्रिय नहीं हुई होती तो मामला सामने ही नहीं आ पाता।