पानी से घिरे गांवों में लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
- फोटो : रविकांत उपाध्याय
बरहज। पिछले दो सप्ताह से बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। चारों तरफ जलजमाव के चलते लोगों को घर से निकलना मुश्किल हो गया है। घाघरा के जलस्तर में कमी हो रही है तो राप्ती अपने उफान पर है।
थाना घाट पर बने जलमापक पर गुरुवार को बाढ़ का पानी 66.85 मीटर पर दर्ज हुआ, फिर भी नदी खतरे के लेवल से 35 सेमी उपर है। इधर कटान भी थमनें का नाम नही ले रही है। एक तरफ जहां घाघरा जमीनों को लील रही है, वही दूसरी तरफ राप्ती भी जमीनों को खंघालना शुरु कर दिया है।
राप्ती की कटान से महेन, विनवापुरी व जनपद की सीमा से सटे गोरखपुर का पवहरिया गांव कटान की जद में आ गया है। पवहरिया में राप्ती पिछले तीन वर्षो से नुकसान पहुंचा रही है। इस समय फिर वहां बेहतासा कटान हो रहा है। गांव की एक सड़क को नदी में बिलीन कर, नदी घरों की ओर अपना रुख कर दिया है। इसको देख गांव वालों के होश उड़े हैं।
दियारा क्षेत्र में पानी से चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। रास्तों के किनारे बाढ़ का पानी भरा हुआ है। आगे पानी बढ़ा तो कई अन्य गांव भी मेरुंड हो जाएगें। पहले से ही तहसील क्षेत्र का भदिला प्रथम, धनया कुंद महाल व विशुनपुर देवार के तेरह टोले बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिरे हैं।
सबसे खराब स्थिती धनया की है, जहां राप्ती गांव को घेर कर कटान कर रही है। रही प्रशासन की ओर राहत देने की बात तो नाव के सिवा गांव में कोई भी सरकारी सामान मुहैया नही कराया गया है। लोग अब भी राहत की टकटकी लगाए बैठे हैं।