बघौचघाट। क्षेत्र के देवरिया धूस स्थित मां हिरमती भवानी मंदिर में चल रहे 23वें श्री सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दौरान चौथे दिन सोमवार को प्रख्यात प्रवचनकर्ता पंडित वीरेंद्र तिवारी ने कथा का रसपान कराते हुए भगवान श्रीराम के जन्म के उपरांत हुए नामकरण संस्कार का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अयोध्या के महाराज दशरथ ने अपने चारों पुत्रों के नामकरण के लिए महान ऋषि वशिष्ठ को आमंत्रित किया था। मुनि वशिष्ठ ने राजकुमारों के गुण, स्वभाव और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके नाम क्रमशः राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे।
पंडित तिवारी ने कहा कि श्रीराम का नाम मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन का प्रतीक है, जबकि भरत त्याग और समर्पण, लक्ष्मण सेवा और निष्ठा तथा शत्रुघ्न पराक्रम और कर्तव्यपरायणता के प्रतीक हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति में लीन नजर आए। वहीं रात्रि में आयोजित रामलीला मंचन ने मंत्रमुग्ध कर दिया।