सलेमपुर। तहसील से एक बार ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही सामने आई है। जांच में पता चला कि जिस छात्रा के नाम ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी किया गया है, उसके माता-पिता सरकारी सेवा हैं। उनकी संयुक्त आय निर्धारित पात्रता सीमा से अधिक है। मामले की शिकायत मिलने के बाद तहसील प्रशासन हरकत में आया और प्रमाणपत्र निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
बलिया जिले के बहादुरपुर निवासी कल्याण सिंह ने शिकायत कर आरोप लगाया था कि तहसील क्षेत्र के बभनौली क्षत्रिय गांव निवासी राजेश की पुत्री के नाम गलत तथ्यों के आधार पर ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाकर उसका लाभ लिया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम मधुसूदन हुल्गी ने इसकी जांच तहसीलदार अलका सिंह को सौंपी। जांच रिपोर्ट के अनुसार राजेश वर्तमान में आईटीआई सहादतपुर, मऊ में अनुदेशक हैं और उनका मासिक वेतन 50 हजार रुपये से अधिक है। उनकी पत्नी सुनंदा सिंह भी हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग में पर्यवेक्षक हैं। दोनों की वार्षिक आय ईडब्ल्यूएस की निर्धारित सीमा से काफी अधिक पाई गई।
जांच में यह भी पता चला कि छात्रा के नाम जारी आय प्रमाणपत्र में वार्षिक आय मात्र 60 हजार रुपये दर्शाई गई है, जिसके आधार पर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। राजेश ने कहा कि उन्होंने सलेमपुर तहसील से आय प्रमाण पत्र के लिए कोई ऑनलाइन आवेदन नहीं किया था। चौकाने वाली बात यह है कि जब राजेश ने आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं किया था तो उसकी बेटी का आय प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया गया।
हालांकि, प्रमाणपत्र जारी करने वाले लेखपाल समीर सिद्धार्थ फिलहाल फाॅर्मर रजिस्ट्री में लापरवाही बरतने के मामले में निलंबित हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण से जुड़े प्रमाण पत्रों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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कोट
मामले की जांच में प्रमाण पत्र त्रुटिपूर्ण तरीके से जारी होना सिद्ध हुआ है। संबंधित आय प्रमाण पत्र और उसके आधार पर जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को निरस्त करने के लिए रिपोर्ट भेज दी गई है। तत्कालीन रिपोर्टिंग कर्मचारी एवं निलंबित लेखपाल समीर सिद्धार्थ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
-अलका सिंह, तहसीलदार सलेमपुर