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Deoria News: नेपाल से सफेद डिब्बे में आता है पॉम ऑयल, यहां बन जाता है ब्रांडेड

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देवरिया। खाद्य तेल में मिलावट और मिस ब्रांडिंग का बड़ा खेल चल रहा है। नेपाल से सस्ते दर वाला पॉम ऑयल बिहार के रास्ते गोरखपुर पहुंच कर ब्रांडेड बन जाता है। इसे अलग-अलग ब्रांड वाले रिफाइंड ऑयल और सरसों के तेल के रूप में बेचा जाता है। देवरिया में इस तरह के तेल के दो नमूने भी फेल हो चुके हैं। गोरखपुर में भी कई नमूने फेल हुए हैं।
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गोरखपुर और आसपास के जिलों में 300 टन प्रतिदिन खाद्य तेल की खपत है, जबकि सरसों का उत्पादन गिरता जा रहा है। इसके बाद यहां तेल की खपत के लिए कानपुर, बरेली, आगरा समेत कई बड़े शहरों की ब्रांडेड कंपनियों के अलावा कई लोकल कंपनियों ने भी मार्केट में अपनी गतिविधि बढ़ा रखी हैं। पिछले साल गोरखपुर-वाराणसी राेड स्थित एक काम्प्लेक्स में छापा मारा गया तो वहां एक बड़े ब्रांड से संबंधित तेल के सात ड्रम मिले।

गोदाम संचालक ने बताया कि कंपनी ने जिन गैलन में यह तेल भेजा था, वह फूट गए थे, इसलिए इस तेल को बिना ब्रांड वाले ड्रम में रख दिया गया। हालांकि जब सैंपल जांच को भेजा गया तो वह फेल हो गया। इसी प्रकार देवरिया में भी रिफाइंड तेल के दो नमूने पिछलों दिनों संदेह के आधार पर लिए गए थे, लेकिन दोनों ही नमूने मानक पर खरे नहीं उतरे।
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नेपाल से बिहार होकर यूपी में आता है पॉम ऑयल

नेपाल से बिहार के सीतामढ़ी के रास्ते यह सफेद तेल आता है। छानबीन में पता लगा कि गोरखपुर के कुछ व्यापारी नेपाल से बिहार के रास्ते सस्ता पॉम ऑयल मंगाते हैं। इसके लिए वे शहर की मिठाई की दुकानों पर खाली हुए तेल के टिन वाले डिब्बे का इस्तेमाल करते हैं। खाली डिब्बों को नेपाल भेजा जाता है, जिसमें पॉम ऑयल भरकर आता है। इस पॉम ऑयल को डिमांड के अनुसार ब्रांडेड रिफाइंड या सरसों के तेल के पैकेट में भरकर बेच दिया जाता है। सरसों का तेल बनाने के लिए इसमें दिल्ली से मंगाया गया रंग व अन्य रसायन मिलाया जाता है। चर्चा है कि सीमावर्ती इलाकों से यह तेल नेपाल से बिहार के सीतामढ़ी, जोगबनी, अररिया और सुपौल के रास्ते होते हुए बलिया होते हुए यूपी में प्रवेश करता है। नेटवर्क से जुड़े लोग इसे गोरखपुर पहुंचाते हैं। यहां से अन्य जगहों को भेजा जाता है। नेपाल से आए सस्ते तेल को ‘ब्रांडेड तेल’ बना देते हैं। इसके बाद इसकी नई पैकिंग पर नकली स्टिकर चिपकाए जाते हैं, जिन पर एमआरपी, पैकिंग डेट, बैच नंबर और कस्टमर केयर नंबर तक प्रिंट होते हैं। नेपाल से आने वाला यह तेल किस क्वालिटी का है, किस प्रोसेस से तैयार होता है और इसमें कौन-सा रिफाइनिंग एजेंट उपयोग किया गया है, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होती। छोटे दुकानदार केवल कमाई के लालच में इन्हें बेच देते हैं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजीव मिश्रा ने कहा कि रिफाइंड तेल के दो नमूने फेल हो चुके हैं। तेल मानक के अनुरूप नहीं मिलने पर संबंधित दुकानदारों को नोटिस भेजा गया है। अगर वे दोबारा सत्यापन कराना चाहेंगे तो फिर सैंपल भेजा जाएगा।



मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, गोरखपुर हितेंद्र मोहन त्रिपाठी ने कहा कि रिफाइंड व सरसों के तेल के कुछ नमूने फेल हो चुके हैं। अधिकतर अधोमानक ही पाए जाते हैं। मतलब यह कि इस तेल में कुछ बाहरी तत्व भी शामिल रहे हैं। संबंधित दुकानदारों को नोटिस भेजा गया है। जल्द ही कुछ जगहों से नमूने लेकर फिर जांच को भेजा जाएगा।
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