- काव्य गोष्ठी में कवियों ने बटोरी वाहवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। क्षेत्र के पिपरा भुल्ली गांव में शुक्रवार को समाजसेवी राजेंद्र प्रसाद मिश्र की पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी हुई। इसमें कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी।
कवि रमेश तिवारी अनजान ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मासूमों के खून से रंगते दीवारें अपनी बेईमानी की खुली किताब होते हैं, नजरों में बसती बस सत्ता व कुर्सी, तरकश में संभाले खूनी दांव होते हैं... प्रस्तुत की, जिस पर उन्होंने खूब वाहवाही लूटी।
रामधारी सिंह दिनकर की पंक्ति सावधान रखते स्वदेश को और बढ़ाते मान भी, राजदूत हैं आंख देश की और राज्य के कान भी..., प्रधानाचार्य और कवि रामेश्वर प्रसाद यादव ने गोरखपुर के फिराक की ये माना जिंदगी है चार दिन की, बहुत होते हैं ये चार दिन भी...प्रस्तुत की। डॉ. संकर्षण मिश्र ने भी रचना प्रस्तुत की। इससे पहले मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. अनिल मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। मौके पर अमित मिश्रा पहाड़ी, सुशील मिश्र, क्षमा मिश्रा आदि मौजूद रहे।