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घनी आबादी के बीच खड़े जर्जर भवनों से खतरा

Wed, 13 Jun 2018 10:54 PM IST
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मालवीय रोड पर जर्जर मकान। - फोटो : amar ujala
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देवरिया। शहर की घनी आबादी के बीच खड़े जर्जर भवन हादसों को न्योता दे रहे हैं। दशकों पुराने इन भवनों की मियाद पूरी हो चुकी है। वे खंडहर की शक्ल ले चुके हैं। उनके कई हिस्से आएदिन टूटकर गिरते रहते हैं। बावजूद उन पर न तो भवन स्वामी का ध्यान है और न ही नगर पालिका प्रशासन की नजर पड़ रही है। पूर्व में कई घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार बेपरवाह हैं। बारिश का मौसम फिर से नजदीक आने के साथ इन भवनों के आस-पास रह रहे लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।  
करीब 21 हजार भवन नगर पालिका की सीमा में स्थित हैं। पालिका प्रशासन इनसे गृहकर व जलकर भी वसूल करता है। सिर्फ टैक्स वसूली से मतलब रखने वाला नगर पालिका प्रशासन जर्जर भवनों को जान-माल के लिए खतरनाक तो मानता है, मगर आज तक उन्हें सूचीबद्ध नहीं कर पाया है। कई भवनों की हालत ऐसी है, जिसे देखकर ही डर लगता है। उनकी छत और बरामदे की ईंट टूटकर नीचे गिर रही हैं। दीवारें फट चुकी हैं। कई का एक सिरा खंडहर हो चुका है। ऐसे भवन कभी भी धराशायी हो सकते हैं। बावजूद इससे बेफिक्र होकर निहित स्वार्थों में कुछ लोग इन्हें ही ठिकाना बनाए हुए है। किसी ने इन भवनों के नीचे दुकान खोल रखी है तो कोई जर्जर हिस्से को ढककर उसमें रह रहा है। शहर के मध्य में ऐसे ही एक भवन में तो शराब की दुकान चल रही है। हर रोज शाम को यहां भीड़ जुटती है। बताते हैं कि पिछले वर्ष इसी मकान का एक हिस्सा ढहा था, जिसके मलबे में दबने से बाइक क्षतिग्रस्त हो गई थी। बावजूद उसमें शराब की दुकान के संचालन से खतरे का अंदेशा बना हुआ है। ज्यादातर जर्जर भवन घनी आबादी वाले इलाकों में है।  
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नियम यह कहता है कि नगर पालिका सर्वे कराकर अपनी सीमा में स्थित जर्जर व खतरनाक भवनों को चिह्नित कर उन्हें जमींदोज कराने के लिए भवन स्वामी को नोटिस दे सकता है। नोटिस देने के बाद भी भवन स्वामी स्वेच्छा से निर्माण नहीं ढहाता है तो पालिका प्रशासन उसे गिराकर खर्च वसूल करेगा। अगर भवन स्वामी नए मकान निर्माण में सक्षम नहीं है तो अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्र में जमीन होने पर नए निर्माण के लिए अनुदान भी सरकार की ओर से दिया जा रहा है।  
कसया रोड स्थित बर्नवाल सेवा समिति के पास मुख्य मार्ग पर स्थित दो मंजिली इमारत में ऊपरी मंजिल का कुछ हिस्सा टूटकर गिर चुका है। दीवारों में दरार साफ नजर आ रही है। निचले तल में चार छोटे बच्चों सहित आठ लोग रहते हैं। सब्जी मंडी स्थित एक मकान के नींव से लेकर छत तक दीवारों में दरार है। छत टूटकर गिर रही है। ऊपरी मंजिल पर खुद मकान मालिक का परिवार रहता था, मगर भवन की हालत देखते हुए वह अन्यत्र रहने चले गए। निचले तल में किराए पर तीन दुकानें चलती हैं। चाय की दुकान में देर शाम तक ग्राहकों की भीड़ जमा रहती है। स्टेशन रोड पर दो मंजिली इमारत में शराब की दुकान चलती है। मकान दीवार से लेकर छत तक जर्जर हो चुकी है। इसके अलावा भी शहर के तमाम मोहल्लों में दर्जनों भवन जर्जर हालत में पड़े हैं, जो एक झटका भी सहने की स्थिति में नहीं है। तेज बरसात में ये खतरनाक साबित हो सकते हैं।
बता दें कि करीब चार वर्ष पूर्व शहर के भीखमपुर रोड स्थित हनुमान मंदिर के समीप जर्जर भवन छह गया था। मलबे में दबने से एक बालिका की मौत हो गई थी। आस-पास के लोग बताते हैं कि भवन धराशाई होने की कगार पर था, मगर किसी नगर पालिका ने उन्हें नोटिस देना तक मुनासिब नहीं समझा। पिछले साल स्टेशन रोड पर स्थित एक पुराने मकान का छज्जा गिर गया था। इससे नीचे खड़ी दो बाइक क्षतिग्रस्त हो गई।  
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कोट 
जर्जर भवन की कोई सूची नहीं है और न ही कोई सर्वे हुआ है। वैसे ऐसे भवन ज्यादातर विवादित ही होते हैं, लिहाजा उन पर कार्रवाई नहीं हो पाती। फिलहाल, एहतियात के तौर पर जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे भवनों को चिह्नित कर उनके स्वामियों को नोटिस दिया जाएगा, तकि किसी तरह की क्षति पर उनकी जिम्मेदारी तय हो सके। जरूरत पड़ने पर नगरपालिका स्वयं भवन गिरा देगी। 
-आरके अग्निहोत्री, सहायक अभियंता नगर पालिका निर्माण विभाग।
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