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बच गई रामप्रवेश की कुर्सी, अविश्वास प्रस्ताव खारिज

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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रसताव के लिए पहुंचे मात्र आठ जिला पंचायत सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जेल की सलाखों में बंद जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की कोशिश विफल हो गई। कोरम के अभाव में अविश्वास के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। 56 सदस्यों वाले जिला पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए कम से कम 29 सदस्यों की जरूरत थी, मगर मंगलवार को सिर्फ आठ सदस्य ही चर्चा के लिए पहुंच सके। काफी देर इंतजार के बाद भी अन्य सदस्यों के नहीं पहुंचने पर पीठासीन अधिकारी एडीजे अश्वनी तिवारी ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। प्रस्ताव रद्द होते ही अध्यक्ष समर्थक खुशी से झूम उठे। पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। इस दौरान सत्ताधारी दल के विरोध में भी नारेबाजी हुई।
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दीपक मणि का अपहरण कर करोड़ों की जमीन बैनामा कराने के मामले में मुख्य आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के जेल जाने के बाद जिला पंचायत सदस्यों का एक खेमा उन्हें अपदस्थ करने के लिए सक्रिय हुआ था। 22 मई को 34 जिला पंचायत सदस्यों ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर सपा समर्थित अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। शपथ पत्रों के सत्यापन के बाद डीएम ने प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 12 जून की तिथि तय की थी। निर्वाचन अधिकारी के रूप में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी तिवारी को नियुक्त किया गया था। सुबह 11 से एक बजे तक चर्चा होनी थी। इसके बाद प्रस्ताव पर वोट पड़ते। मंगलवार को जिला पंचायत सभागार में तय समय पर बैठक की कार्यवाही शुरू हुई तो चर्चा के लिए सदस्य ही नहीं पहुंचे। नोटिस देने वाले 34 में से महज आठ सदस्य ही जिला पंचायत सभागार में उपस्थित हुए। काफी देर तक इंतजार के बाद भी अन्य सदस्यों के नहीं पहुंचने पर कोरम का अभाव बताते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। चुनाव अधिकारी ने जैसे ही इसकी घोषणा की, अध्यक्ष समर्थक खुशी से झूम उठे। एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी और पटाखे फोड़कर खुशियां मनाई। इस दौरान सपा के समर्थन में नारे लगे, जबकि सत्ताधारी दल के खिलाफ भी नारेबाजी हुई। हालांकि सपा के कई नेता अविश्वास प्रस्ताव खारिज कराने में भाजपा नेताओं के सहयोग का भी दावा करते रहे। अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद सपा के पूर्व मंत्री शाकिर अली, एमएलसी रामअवध यादव, कमला यादव, ओमप्रकाश तिवारी, लल्लन सिंह, धर्मवीर गुप्ता, प्रदीप यादव, सिकंदर यादव, अजय यादव, विजय यादव, जगदीश यादव, संजीव यादव, अर्जुन, प्रभात आदि मौजूद रहे। हालांकि इस कामयाबी के बाद भी सपा जिलाध्यक्ष की नामौजूदगी चर्चा का विषय रही।


चर्चा में यह सदस्य रहे मौजूद
56 सदस्यों वाले जिला पंचायत सदस्य मेें 34 ने अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस दी थी, मगर चर्चा में सिर्फ आठ सदस्य ही शामिल हो पाए। इसमें जिला पंचायत सदस्य कृष्ण मणि तिवारी, प्रेमलता सिंह, शांति तिवारी, कृपाशंकर उपाध्याय, घनश्याम गोड़, रविप्रताप सिंह, पूनम सिंह शामिल रहे। अन्य सदस्यों का कहीं अता-पता नहीं था, जबकि अध्यक्ष जेल में होने के कारण नहीं आ सके।
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अब शासन के पाले में गेंद
जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव संगीन आपराधिक मामले में जेल में है। जिला पंचायत के कामकाज निपटाने के लिए शासन ने डीएम को प्रशासक नियुक्त किया है, मगर अधिकतम छह माह तक ही प्रशासक को कार्यभार दिया जा सकता है। उम्मीद थी कि अविश्वास प्रस्ताव पास होगा तो नए सिरे से अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा। प्रस्ताव खारिज होने से असमंजस की स्थिति बन गई है। छह माह की अवधि में रामप्रवेश जेल से रिहा नहीं हुआ तो फिर कमान किसे सौंपी जाएगी, इस पर चर्चा होती रही। जानकारों की मानें तो अब गेंद शासन के पाले में चली गई है। वह चाहे तो अध्यक्ष को बर्खास्त कर आगे के कार्यकाल के लिए त्रिसदस्यीय कमेटी गठित कर सकती है।



56 जिला पंचायत सदस्यों में 29 सदस्यों की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ आठ सदस्य ही आ सके, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। अब एक साल तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं आ सकता है। शासन ने मुझे अध्यक्ष का कार्य करने के लिए प्रशासक के रूप में नियुक्त किया है।
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-सुजीत कुमार, डीएम।
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