देश की रक्षा करते शहीद हुए बीएसएफ के जवान प्रेमसागर की अंत्येष्टि के बाद प्रशासनिक अफसर टीकमपार का रास्ता भूल गए हैं। शहीद की चिता की आग ठंडी होने के बाद न तो किसी अफसर को टीकमपार जाने की फुर्सत मिली, न ही घरवालों का हाल जानने के लिए किसी ने फोन ही किया। इससे शहीद के घर वाले दुखी हैं। उन्हें इंतजार है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने का। मुख्यमंत्री ने शहीद की तेरहवीं से पहले टीकमपार आने का वादा शहीद के बड़े बेटे ईश्वरचंद से कर रखा है।
टीकमपार में शुक्रवार को पांचवें दिन भी सन्नाटा दिखा। शहीद के घर पर उनके बड़े भाई शंकर और छोटे भाई बीएसएफ के एएसआई दयाशंकर का परिवार है। स्थानीय नेताओं के आने-जाने का सिलसिला बना हुआ है। शहीद प्रेमसागर के बड़े बेटे ईश्वर चंद ने बताया कि पापा का ब्रह्मभोज 15 मई को है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री आएंगे। उन्होंने बताया कि अंत्येष्टि के बाद न तो उसके घर कोई अफसर आया और न ही किसी ने फोन किया। जब तक पापा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था, तब तक अधिकारी बड़े-बड़े दावे कर रहे थे। अलबत्ता बीएसएफ हेड क्वार्टर से फोन आया था कि एक-दो दिनों में वह पापा का सामान और पेंशन के कागजात लेकर आएंगे। दलित बस्ती के लोगों का कहना है कि शहीद प्रेमसागर के घर के सामने मैदान है। शाम होते ही बच्चे वहां खेलने लगते थे, लेकिन अब बच्चे घर से बाहर निकलना नहीं चाह रहे हैं।