देवरिया। यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए प्रशासन सख्ती के दावे तो कर रहा है, लेकिन हकीकत में कार्रवाई के बजाय केवल नसीहतों से काम चलाया जा रहा है। पिछले सप्ताह हुई जांच में जिले के जिन आठ परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे बंद मिले थे, उन पर भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा कंट्रोल रूम से कई केंद्रों पर कक्ष निरीक्षक बिना आईकार्ड के ड्यूटी करते चिन्हित किए गए थे। बावजूद इसके अब तक किसी केंद्र पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की ओर से संबंधित केंद्र व्यवस्थापकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी किसी परीक्षा केंद्र ने अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया है। यह स्थिति तब है, जबकि जिला नकल के लिए बदनाम है और प्रदेश के 16 संवेदनशील जिलों में शामिल है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर सख्त कदम उठाने के बजाय केवल चेतावनी देकर मामला शांत करने की कोशिश की जा रही है। बोर्ड परीक्षा में जिले के करीब एक लाख 16 हजार परीक्षार्थी शामिल हैं। इनके लिए 174 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा संपन्न कराने के लिए शासन की ओर से सीसीटीवी कैमरे, वॉयस रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। ऐसे में कैमरों का बंद मिलना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि कुछ केंद्रों पर कक्ष निरीक्षक बिना आईकार्ड कमरों में ड्यूटी कर रहे हैं। यह भी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। ऐसा नहीं होने से पता ही नहीं चल पाएगा कि कक्ष निरीक्षक कौन है और किस विषय का अध्यापक है।
कोट
आठ परीक्षा केदो पर कुछ देर तक कैमरे बंद मिले थे उन केदो के व्यवस्थापकों से आख्या मांगी गई है अभी तक किसी ने आख्या नहीं दी है। इन केंद्रों के खिलाफ नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
नीलेश पांडेय, सह जिला विद्यालय निरीक्षक देवरिया