संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। सरकार की अति महत्वाकांक्षी जननी सुरक्षा योजना का रुद्रपुर में जिम्मेदार बेड़ागर्क करने में लगे हैं। टड़वा गांव में खंडहर बन चुके एएनएम सेंटर में तीन माह में नौ नवजात शिशु जन्म ले चुके हैं, जबकि यह सेंटर 15 वर्ष से क्रियाशील नहीं है।
रुद्रपुर में खंडहर में तब्दील हो चुके आठ एएनएम सेंटर पर हर माह नवजातों की किलकारी गूंज रही है। विभाग की मिलीभगत से प्राइवेट अस्पताल में पैदा होने वाले बच्चे कागज में जर्जर एएनएम सेंटर पर जन्म ले रहे हैं।
अमर उजाला में डिलीवरी में गोलमाल की खबर प्रकाशित होने के बाद शासन के संज्ञान लेने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। डीएम दिव्या मित्तल के निर्देश पर डिलीवरी घोटाले पर जांच बैठा दी गई है। बृहस्पतिवार को टड़वा गांव स्थित एएनएम सेंटर का जायजा लिया गया।
ग्रामवासी मीरा देवी ने कहा कि यहां के एएनएम सेंटर पर करीब 15 साल से कोई काम नहीं हो रहा है। यह केंद्र पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दरवाजा, खिड़की सब टूट गया है। कभी एएनएम नहीं आती हैं।गांव की गर्भवती महिलाओं को टीका लगवाने के लिए रुद्रपुर सीएचसी जाना पड़ता है। लालमति देवी ने कहा कि एएनएम सेंटर पर कौन कहे, गांव में भी कोई सरकारी कर्मचारी प्रसूता या गर्भवती का हालचाल लेने नहीं आता है। प्रसव कराने के लिए गाड़ी से लेकर निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
जबकि सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि टड़वा के जर्जर एएनएम सेंटर पर अप्रैल में दो, मई में तीन, और जून माह में चार प्रसुताओं का प्रसव कराया गया। सीएचसी के अधीक्षक डॉ. एसके राव ने बताया कि इस मामले में जांच बैठा दी गई है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई होगी।