सलेमपुर। नगर पंचायत कार्यालय के सामने चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने कहा कि भागवत कथा का उद्देश्य प्राणि मात्र का कल्याण है। जो व्यक्ति भागवत कथा सुन लेता है, उसका भाग्य परिवर्तित हो जाता है। उन्होंने नारद जी के पूर्व जन्म की कथा सुनाई।
कहा कि नारद जी दासी के बेटा थे, लेकिन भागवत कथा सुनने से उनके जीवन में ऐसा परिवर्तन आया की दासी के बेटा से भगवान के दास नारद बन गए थे। बताया कि राजा परीक्षित ने भी भागवत कथा सुनी, परीक्षित जीवन में माता की की गर्भ से ही उन्हें सुरक्षा के कवच धारण भगवान ने कर दिए थे। राजा परीक्षित परम धार्मिक राजा थे। अपने राज्य में किसी तरह से अनीति अन्याय नहीं होने देते थे। सोने में कलयुग बैठ गया, महाराज परीक्षित की बुद्धि विकृत हो गई संत के प्रति दोष दर्शन करने लगे और समीक ऋषि आश्रम पहुंच कर अपराध उन्होंने कर दिया। मरा हुआ गले में सांप डाल दिया। उनके जो पुत्र थे श्रृंगी उन्होंने उनको श्राप दे दिया कि तुमने मेरे पिता का अपमान किया है इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि आज से सप्तम दिवस में तुम्हारी तक्षक के डसने से मौत होगी। जब उनके पिता समीक को यह बात पता चली, तब उन्होंने अपने शिष्य को भेज करके परीक्षित को सूचना दी। परीक्षित को जब यह बात पता चला तो उन्होंने अपने राजसी वस्त्र आभूषण त्याग करके और गंगा के पावन तट पर शुकताल में पहुंच गए। वहां पर बड़े-बड़े ऋषियों के मध्य पहुंचकर के उन्होंने दो ही प्रश्न किए हैं कि जिसकी मृत्यु निकट में है उसको क्या करना चाहिए और सदा सर्वदा जीव को क्या करना चाहिए। इन प्रश्नों का जवाब किसी ऋषि ने नहीं दिया। तब महाराज परीक्षित ने आंखें बंद करी। शुकदेव जी वहां पर प्रकट हुए। शुकदेव जी ने वह 7 दिन की कथा सुना करके उनका जीवन भगवत में बना दिया। इस मौके पर संजय श्रीवास्तव, अखिलेश पांडेय, बृजेश गुप्ता, चंदन बर्नवाल, राजन कृष्ण, दुर्गेश पांडेय, डॉ. पीके दुबे, सभासद अशोक गुप्ता, नीरज ठाकुर आदि लोग मौजूद रहे।