सलेमपुर। समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने मंगलवार को लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर सब कुछ ठीक-ठाक दिखाई देता है, लेकिन जब जनप्रतिनिधि गांवों में जमीन पर उतरते हैं तो वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक नजर आती है।
सांसद ने गरीब वर्ग की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि इस देश में कठिन परिश्रम का अधिकांश बोझ आज भी गरीबों पर है, जो पीढ़ियों से संघर्ष करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी में गरीब आग से झुलसकर, बरसात में मकान गिरने से और सर्दी में ठंड से ठिठुरकर जान गंवाते हैं। वहीं बेटियों की शादी और बेटों के इलाज तक के लिए उनके पास पैसे नहीं होते।
उन्होंने सरकार के आर्थिक दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश की जीडीपी बढ़ रही है तो युवाओं में बेरोजगारी क्यों बढ़ रही है। आउटसोर्सिंग के बढ़ते चलन और सरकारी नौकरियों में कटौती को लेकर उन्होंने चिंता जताई। साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आरक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जबकि लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं और उन्हें भरा नहीं जा रहा।
एलपीजी गैस सिलिंडर वितरण व्यवस्था पर भी सांसद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है, जिसके तहत शहरी उपभोक्ताओं को 25 दिन और ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिन बाद गैस सिलिंडर देने की बात कही जा रही है। उन्होंने इस भेदभाव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गैस की जरूरत रोजाना होती है, ऐसे में यह व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है।
सांसद ने यह भी कहा कि ऑनलाइन बुकिंग की अनिवार्यता गांवों के गरीबों के लिए परेशानी का कारण बन रही है, क्योंकि कई लोगों के मोबाइल बंद पड़े हैं या वे तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं। उन्होंने सरकार से जमीनी हकीकत को समझते हुए नीतियों में सुधार करने की मांग की।