संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। काम का बढ़ता बोझ, परिवार में संवाद की कमी और आधुनिक जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। मानसिक समस्याओं को कलंक समझने के बजाय उन्हें गंभीरता से लेने और पीड़ितों की बात सुनने की जरूरत है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर शनिवार को जिले में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और समय पर मदद लेने का संदेश दिया।
मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को उठाया। प्रस्तुति के जरिये एडीएचडी, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की गई।
डॉ. तूलिका ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को जरूरी बताया। डॉ. शगुफ्ता अफरोज ने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
वहीं, रोटरी क्लब देवरिया सदर की ओर से एक होटल में आयोजित परिचर्चा में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मानसिक रोग को कलंक या अभिशाप मानने की धारणा बदलनी होगी।
अवसाद, नींद की कमी, आत्मविश्वास में गिरावट और अत्यधिक गुस्सा जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव, डॉ. विवेक मिश्र, आईटीआई प्रधानाचार्य केके राम, क्लब अध्यक्ष राकेश धर द्विवेदी और सचिव हिमांशु कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।
परिचर्चा का संचालन हिमांशु कुमार सिंह ने किया। दोनों कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।