विधायक ने एसएमआई गोदाम की जांच की
बोरों का कराया वजन, घटतौली मिलने पर डीएम से की शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। तहसील के कपरवार मार्ग स्थित एसएमआई गोदाम पर क्षेत्रीय विधायक सुरेश तिवारी पहुंचे। मौके पर मार्केटिंग इंस्पेक्टर संतोष सिंह मौजूद थे। रखे गए राशन का स्टॉक रजिस्टर से मिलान करते हुए अधिकांश बोरों का वजन कराया। विधायक ने घटतौली मिलने पर कर्मियों को हिदायत देते हुए डीएम अमित किशोर से शिकायत की।
बृहस्पतिवार को करीब तीन बजे अचानक विधायक एसएमआई गोदाम पर पहुंच गए। जिनको देखकर सभी हक्का-बक्का रह गए। मौके पर श्रमिक आए राशन से भरे ट्रक को खाली कर रहे थे। विधायक ने गोदाम में रखे राशन के स्टॉक में से अलग-अलग जगहों के बोरों की तौल कराई। तौल में अधिकांश बोरे 50 की जगह 48, 46.260 किग्रा पाए गए। जिसे देखकर विधायक बिफर पड़े। उन्होंने इसकी शिकायत फोन पर डीएम से की। जबकि शासन को रिपोर्ट भेजने की भी बात कही। आपूर्ति के लिए उसरा बाजार और रघवापुर गोदाम से खाद्यान्न मंगाया जाता है। विधायक ने बताया कि घटतौली की बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। जिस पर जांच की गई है। मौके पर कामेश्वर पांडेय, राजन सिंह, राममिलन यादव, रामजोखन निषाद, विपुल दूबे, मकसूदन, आशुतोष सिंह आदि उपस्थित रहे।
कोटेदारों तक पहुंची दूसरे प्रांत के श्रमिकों की सूची
राशन वितरण में हुआ खेल तो सक्रिय हुआ विभाग
जांच में सात हजार से अधिक लोग सूची में मिले गलत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महामारी में घर आने वाले श्रमिकों के नाम पर राशन वितरण में खेल जारी है। दूसरे प्रांत के श्रमिकों के नाम पर भी राशन बांटा जा रहा है। मामला उजागर होने पर पूर्ति विभाग ने सक्रियता दिखाई है। जांच में अभी तक करीब सात हजार ऐसे लोग चिह्नित किए गए हैं जो दूसरे प्रांत के रहने वाले हैं।
महानगरों से घर आने वाले श्रमिकों को राशन उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। राशन कार्ड जिनके पास नहीं है। उनको पात्रता के आधार कोटेदारों को राशन देना है। देवरिया में श्रमिकों को लेकर कई ट्रेनें आईं। इसमें जिले के अलावा दूसरे जिले और बिहार के मजदूर भी देवरिया आए। इन्हें बस से घर तक भेजा गया। रेलवे स्टेशन पर आने वाले मजदूरों की सूची तहसील प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तैयार की। यही सूची मोबाइल नंबर और नाम के साथ पूर्ति विभाग को राशन मुहैया कराने के लिए सौंप दी गई। कोटेदारों तक यह सूची पहुंची तो पता चला कि इस नाम का कोई व्यक्ति गांव में नहीं है। ऐसे में राशन का दुरुपयोग भी हुआ। इनके नाम पर कई काटेदारों ने राशन डकार लिया। अफसरों तक यह मामला पहुंचा तो पूर्ति विभाग ने मोबाइल नंबर से पता किया तो शिकायत सहीं मिली। अधिकांश श्रमिक दूसरे जिले के रहने वाले हैं। सात हजार से अधिक श्रमिकों का नाम निरस्त किया गया है। विभागीय लापरवाही के कारण ऐसा हुआ है। पूर्ति विभाग सूची को ठीक करने में जुटा है। इस बाबत जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि तहसील प्रशासन की ओर से सूची जो दी गई थी। उसको कोटेदारों को भेजा गया था। बाद में मालूम हुआ कि इस सूची में दूसरे जिले के श्रमिकों का नाम है। इसे पताकर सूची को ठीक किया जा रहा है।