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Deoria News: नहीं रुक रहा मिलावट का धंधा, मसाला की खरीदारी करते समय रहें सचेत

Wed, 29 May 2024 02:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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जांच के नाम पर खानापूर्ति करता है खाद्य विभाग, नहीं होती कोई कार्रवाई

संवाद न्यूज एजेंसी

देवरिया। जरूरत की वस्तुएं हों या रोजमर्रा उपयोग में आने वाली मसाले, पहले ही महंगाई के कारण घरों में कम इस्तेमाल होने लगे हैं। इस पर भी मसालों में मिलावट ने गृहणियों की चिंता और बढ़ा दी है। उनके सामने संकट यह है कि आखिर खाएं तो क्या खाएं, एक तो महंगी वस्तुएं ऊपर से मिलावट होने के कारण स्वास्थ्य से खिलवाड़। खाने-पीने की चीजों में हो रही मिलावट से मसाले भी अछूते नहीं हैं। हल्दी, धनिया, जीरा से लेकर काली मिर्च तक में मिलावट की जा रही है, लेकिन मिलावटखोरों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
दही-बड़े, टिक्की, समोसे के अलावा खाने में बनने वाली सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए मसालों का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है। लेकिन मसाले अगर मिलावटी हों तो वह स्वाद तो खराब करते ही हैं। साथ ही बीमारियां भी फैलाते हैं। मसालों में तरह-तरह के पाउडर आदि मिलाकर उनका वजन बढ़ाया जाता है। बाद में सादा पैकिंग में छोटे दुकानदारों को सप्लाई किया जाता है, लेकिन मुनाफे के इस खेल में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। ब्रांडेड मसालों में स्थानीय दुकानदार मिलावट तो नहीं कर पाते लेकिन एक्सपायरी डेट के मसाले बेच देते हैं।
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ग्राहक अगर मसाले पर एक्सपायरी डेट देख लेता है तो उसे सादा पैकेट देकर दुकानदार मामले को दबा देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ किराना व्यापारी तो यह खेल ज्यादा ही कर रहे हैं।


सिंथेटिक कलर और खराब सामग्री का प्रयोग कर बना रहे मसाला
मसालेदार भोजन के शौकीन हैं, तो यह आपको सावधान करने वाली खबर है। धंधेबाज सस्ते का लालच देकर खुले पिसे मसालों में सिंथेटिक कलर और खराब सामग्री का प्रयोग कर आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यह समस्या इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावटखोर ढूंढ़े नहीं मिल रहे। खुले पिसे मसालों की बिक्री पर रोक है, लेकिन शहर की कई दुकानों में ये मसाले खुलेआम बिक रहे हैं। ऐसे में आपको सावधान रहने की जरूरत है।



सबसे ज्यादा इन मसालों में होती है मिलावट, कैसे करें इनकी पहचान

आपको अगर सबसे ज्यादा मिलावट कहींं देखने को मिलेगा तो वो हैं मसाले। दरअसल, मसालों के बारे में सबको ज्यादा जानकारी नहीं होती है, इसीलिए मिलावटखोर बड़े आराम से मसालों में मिलावट कर लेते हैं। जैसे काली मिर्च में पपीते का बीज मिला देते हैं, लाल मिर्च में रंग वाला पाउडर और ईंट पीस कर मिला देते हैं। धनिया पाउडर में तरह-तरह की मिलावट करते हैं। हल्दी में पीला रंग मिला देते हैं और जीरा में झाड़ू वाला जीरा मिला देते हैं।



इन मसालों में सबसे ज्यादा होती है मिलावट
सबसे ज्यादा मिलावट लाल मिर्च, हल्दी, धनिया, दाल चीनी और काली मिर्च होती है। लाल मिर्च में लाल रंग, लाल ईंट बारीक पीसा पाउडर मिला दिया जाता है। जबकि हल्दी में मेटानिल येलो नामक रसायन की मिलावट होती है। इससे कैंसर जैसी बीमारी का खतरा रहता है। मिलावट खोर धनिया पाउडर में कई तरह के खर-पतवार को बारीक पीस कर मिला देते हैं। इसके अलावा इसमें आटे की भूसी को भी मिला दिया जाता है। वहीं, दालचीनी में अमरूद की छाल की मिलावट होती है। जबकि, काली मिर्च में पपीते के बीजों की मिलावट की जाती है।



ऐसे करें मिलावट की पहचान
अगर लाल मिर्च में मिलावट की पहचान करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको मिर्च पाउडर को पानी में डालकर देखना होगा, अगर लाल मिर्च पाउडर पानी में तैरता रहे तो ये शुद्ध है और अगर डूब जाए तो इसका मतलब कि इसमें मिलावट की गई है। वहीं, हल्दी पाउडर में मिलावट जांच के लिए इसमें कुछ बूंद हाइड्रोक्लोरिक एसिड और कुछ बूंदें पानी की डालकर चेक कर सकते हैं। अगर हल्दी का कलर गुलाबी या बैंगनी हो जाए, तो इसका मतलब कि इसमें मिलावट की गई है। इसी तरह धनिया पाउडर में मिलावट का पता आप उसकी खुशबू से लगा सकते हैं। वहीं, दालचीनी में मिलावट को परखने के लिए इसे हाथ पर रगड़कर देखें। अगर कुछ कलर नजर आए, तो यह असली है, नहीं तो समझ लीजिए कि नकली है। जबकि काली मिर्च में मिलावट चेक करने के लिए इसको पानी या शराब में डाल कर देखें। अगर काली मिर्च तैरती दिखाई दे तो समझ जाइए कि ये नकली है और अगर डूब जाए तो इसका मतलब कि ये असली है।


लीवर में इंफेक्शन और अल्सर होने का खतरा
मेडिकल काॅलेज के फिजिशियन डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि मसाले में मिलावट का सेहत पर असर पड़ता है। यह हानिकारक होता है। मिलावटी मसाले का सेवन करने से गैस, कब्ज, बदहजमी, डायरिया व्यक्ति पीड़ित हो सकता है। इसके अलावा लीवर में इंफेक्शन, हेपेटाइटिस, आंत में घाव, अल्सर होने की भी आशंका रहती है।
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वर्जन

हर माह मसालों सहित अन्य सामान की गुणवत्ता को जांचने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जाता है। इसी माह मसालों के चार नमूने लिए गए हैं। इसे जांच के लिए राजकीय लैब भेजा गया है। रिपोर्ट अभी नहीं आई है। फेल मिलने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार वाद दायर कराया जाएगा।
-विनय कुमार सहाय, सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड टू
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