- मेडिकल कॉलेज में पानी की टंकी में शव मिलने की गुत्थियां सुलझाने के करीब पहुंची पुलिस
- दो बार गायब हुए अशोक मगर पुलिस को खबर तक नहीं दी
-जांच में पुलिस के हाथ लगेे अहम सुराग, महाराष्ट्र से भी सबूत जुटाकर लौटी टीम
-पत्नी और साला कर रहे अशोक की मानसिक स्थिति ठीक न होने का दावा, मेडिकल कॉलेज में हुआ था पैर में घाव का इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में पानी की टंकी में लाश मिलने के बाद जांच में जुटी पुलिस मामले की गुत्थियां सुलझाने के करीब पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि पानी की टंकी में डाले जाने से पहले अशोक की सांसें थम चुकीं थीं क्योंकि फेफड़े में पानी नहीं गया था। इसके अलावा शरीर पर चोट के निशान भी मिले हैं। इस तरह कई सुराग हत्या की तरफ इशारा कर रहे हैं और पुलिस के शक की सुई मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बिल्डिंग पर टिकी है। पुलिस अब कातिलों को बेनकाब करने में जुटी है।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बिल्डिंग में ही हत्या का ब्लू प्रिंट तैयार होने का अंदेशा भी मजबूत होता जा रहा है। साले प्रफुल्ल और पत्नी तनु का दावा है कि अशोक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी जबकि सर्जिकल वार्ड में भर्ती अशोक का मानसिक रोग का नहीं बल्कि पैर के घाव का इलाज किया जा रहा था। अशोक के बीएचटी पर दर्ज दवाएं इसकी गवाही दे रहीं हैं। वहीं, 24 घंटे में दो बार सर्जिकल वार्ड से अशोक गायब हुए, मगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी। इस मामले में संदिग्ध मिले तीन स्वास्थ्यकर्मियों की पुलिस निगरानी कर रही है। पुलिस की जांच में अब तक मिले साक्ष्य अशोक की हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच के लिए महाराष्ट्र गई पुलिस टीम भी देवरिया लौट आई है और वहां मिले तथ्यों को भी ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।
मेडिकल कॉलेज के भर्ती रजिस्टर में अशोक के नाम पते के साथ मोबाइल नंबर 886882 भी दर्ज है। हालांकि अब यह नंबर बंद मिल रहा है। वहीं, 108 अशोक को अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस को कॉल करने वाले पुरवां के सुदर्शन यादव ने बताया कि एक अनजान व्यक्ति उन्हें औरा चौरी में सड़क के किनारे पड़ा मिला था। उसने दो मोबाइल नंबर बताए और बात कराने के लिए कहा था। सुदर्शन के मुताबिक कॉल करने पर एक नंबर बंद मिला जबकि दूसरे पर कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद अशोक ने व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम के जरिये बात कराने के लिए भी कहा था।
खुद देखने के बाद ही लेते थे दवा और इंजेक्शन
108 नंबर एंबुलेंस के ईएमटी, इमरजेंसी में इलाज करने वाले डॉक्टर और सर्जिकल वार्ड में अशोक के भर्ती होने के दौरान मौजूद रहे स्वास्थ्यकर्मियों ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि अशोक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्हें चाय पसंद नहीं थी और बार-बार कॉफी मांग रहे थे। यह भी कहा था कि अस्पताल उनके इलाज के लायक नहीं है। दवा और इंजेक्शन लेने से पहले खुद चेक करते थे। इससे पता चलता है कि दवाओं के बारे में उन्हें जानकारी थी। मुमकिन है कि उन्हें अनहोनी का संदेह भी रहा हो।
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छह अक्तूबर को मिला था शव
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कुलगांव इलाके के रहने वाले 61 वर्षीय अशोक गवांडे का शव छह अक्तूबर को मेडिकल कॉलेज में पानी की टंकी में मिला था। टंकी के बाहर से नीले रंग की शर्ट और मेडिकल कॉलेज की चादर भी पुलिस ने बरामद की थी। 108 नंबर एंबुलेंस से लाकर भर्ती कराए गए अशोक की पहचान पुलिस ने वारदात के तीसरे दिन कर ली थी। हत्या और आत्महत्या के बीच उलझी गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस अशोक महाराष्ट्र स्थित घर और गोरखपुर में ससुराल के अलावा देवरिया मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने के बीच की कड़ियां जोड़ रही है।
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पत्नी से मनमुटाव पर बात करने आए थे ससुराल
अशोक मुंबई में खुद के मकान में रहते थे जबकि विवाद के बाद पत्नी तनु बेटी के साथ किराए के मकान में रहने लगी थी। अशोक के बैंक खाते की डिटेल भी पुलिस खंगाल रही है। जांच टीम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि अशोक पत्नी से रिश्तों बढ़ी दूरी को लेकर बात करने गोरखपुर स्थित ससुराल आए थे। वहीं, साले प्रफुल्ल ने सिर्फ 20 मिनट ही अशोक के ससुराल में रुकने की बात कही है। इस बिंदु को भी पुलिस ने अपनी जांच में प्रमुखता से शामिल किया है।
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अशोक के परिजनों कोे सोमवार को बुलाया गया है। वार्ड से मरीज के गायब होने की सूचना मेडिकल काॅलेज प्रशासन ने नहीं दी थी। जांच में कई तथ्य निकलकर सामने आए हैं जो हत्या की तरफ इशारा कर रहे हैं। उन सभी बिंदुओं पर पुलिस टीम काम कर रही है। जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
- संजय रेड्डी, सीओ सिटी